- Post by Admin on Wednesday, Sep 16, 2026
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गोपी साहू : त्योहार सिर्फ खुशियां मनाने का मौका नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद करने का भी जरिया बन सकता है यही साबित कर रहे हैं मुंबई के पूजा और दीपेश देधिया। इस गणेश चतुर्थी पर उन्होंने अपने घर आने वाले मेहमानों से पारंपरिक उपहार या मिठाई के बदले नई और बिना इस्तेमाल की गई स्टेशनरी लाने का अनुरोध किया है, ताकि यह सामान खडावली के एक आदिवासी आश्रम शाला में पढ़ने वाले करीब 400 बच्चों तक पहुंचाया जा सके।
गौरतलब है कि, दंपत्ति का यह गणेश उत्सव पहले से ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहा है। वे मूर्ति का विसर्जन घर पर ही करते हैं और बचे हुए बीज वाले पानी का उपयोग पौधे उगाने में करते हैं। इस बार उन्होंने अपने उत्सव को समाज सेवा से जोड़ने का फैसला किया ताकि उनके घर आने वाला हर आशीर्वाद किसी बच्चे के स्कूल बैग तक पहुंच सके।
यह विचार अचानक नहीं आया। पेशे से शेफ और पोषण विशेषज्ञ पूजा, और बैंकर दीपेश, मातोश्री फाउंडेशन के जरिए जुलाई 2023 से हर रविवार वंचित समुदाय के लोगों को नाश्ता कराते आ रहे हैं। अब तक वे लगातार 167 रविवार यह सेवा दे चुके हैं। यही निरंतरता और सेवा-भावना उनके त्योहार मनाने के तरीके में भी झलकती है।
पिछले साल गणेश चतुर्थी पर उन्होंने पहली बार यह प्रयोग किया था और 40 बच्चों के लिए स्टेशनरी किट तैयार की थी। बच्चों के चेहरे पर अपनी खुद की चीज पाने की खुशी देखकर दंपत्ति को एहसास हुआ कि यह पहल कितनी असरदार हो सकती है। इसी अनुभव ने उन्हें इस साल और बड़े स्तर पर काम करने की प्रेरणा दी।
इस साल का लक्ष्य 400 बच्चों तक पहुंचना है। किट में नोटबुक, पेंसिल, पेन, रंग, ड्राइंग बुक और ज्यामिति बॉक्स जैसी जरूरी चीजें शामिल होंगी। इतने बड़े पैमाने पर सामान जुटाना आसान नहीं इसके लिए विक्रेताओं से बातचीत, जरूरतों की सूची बनाना और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हर किट सही समय पर बच्चों तक पहुंचे।
20 सितंबर तक दान स्वीकार किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि मुंबई से बाहर या देश से बाहर रहने वाले लोग भी मदद कर सकते हैं दंपत्ति से संपर्क कर विक्रेता की जानकारी ली जा सकती है और सीधे किट के लिए योगदान दिया जा सकता है। पूजा और दीपेश के लिए यही गणेश चतुर्थी का असली मतलब है बप्पा का स्वागत घर में करना, और उनका आशीर्वाद घर की चौखट से बाहर तक फैलाना।
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