- Post by Admin on Sunday, Aug 30, 2026
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कमलेश यादव : संस्कारधानी राजनांदगांव से महज चार किलोमीटर दूर, खैरागढ़ मार्ग पर बसा एक छोटा-सा गांव गठुला, मिट्टी की सोंधी खुशबू, खेतों की हरियाली और साधारण जिंदगी जीते लोगों का यह गांव किसी बड़े सपने के लिए जाना नहीं जाता था। पर हर छोटे गांव की मिट्टी में भी कभी-कभी कोई बड़ा इतिहास चुपचाप करवट ले रहा होता है, बस उसे पहचानने वाली नजर चाहिए होती है। यहीं इसी मिट्टी में एक परिवार ने वर्षों पहले एक सपना बुना था, एक ऐसा सपना जो न किसी एक व्यक्ति का था, न किसी एक पीढ़ी का, बल्कि पूरे घर की सांसों में बसा था। और, वर्षों के इंतजार, त्याग और अटूट विश्वास के बाद, वह सपना हकीकत की जमीन पर खड़ा है डॉक्टर हेमंत कुमार साहू के रूप में।
गौरतलब है कि ग्राम गठुला के इसी परिवार में जन्मे हेमंत के लिए सफलता का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन घर में शुरू से ही शिक्षा को लेकर एक अलग ही माहौल था। बड़े भाई यतीश कुमार साहू और भाभी वैशाली साहू का मार्गदर्शन हेमंत के लिए किसी संबल से कम नहीं रहा। हर मुश्किल घड़ी में, हर असफलता के बाद, यही दोनों उनके हौसले की ढाल बने रहे। माता श्रीमती गंगा साहू का स्नेह और पिता घनश्याम दास साहू का अनुशासन जो स्वयं एक जाने-माने अधिवक्ता हैं , इन दोनों ने मिलकर हेमंत के भीतर वह जिद्द भर दी जो किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी होती है। यह सिर्फ एक बेटे का संघर्ष नहीं था, यह पूरे परिवार की तपस्या थी।
बड़े भाई यतीश आज भी जब उन दिनों को याद करते हैं तो उनकी आंखों में एक चमक आ जाती है। वे कहते हैं कि हेमंत के भीतर बचपन से ही लोगों की सेवा करने की भावना कूट-कूट कर भरी थी। जब कोई गांव का व्यक्ति बीमार पड़ता, तो छोटा हेमंत बेचैन हो उठता मानो उसकी नियति पहले से ही तय थी। आज जब वही बालक डॉक्टर हेमंत साहू के रूप में मरीजों की सेवा करते नजर आते हैं, तो परिवार की आंखें नम हो जाती हैं। यह खुशी के आंसू हैं, उस संघर्ष के गवाह जो कभी रातों की नींद और दिन के चैन की कीमत पर चुकाया गया था।
आज डॉक्टर हेमंत कुमार साहू मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव में कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां हर दिन वे अनगिनत जिंदगियों को नई सांस देने का काम करते हैं। लेकिन उनकी सेवा-भावना यहीं नहीं रुकती। बजरंगपुर नवागांव में वे नियमित रूप से ओपीडी भी संभालते हैं, ताकि दूरदराज के जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और किसी को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में तकलीफ न झेलनी पड़े। यही वह सच्चा डॉक्टर धर्म है जिसे हेमंत ने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है।
डॉक्टर हेमंत साहू बड़ी विनम्रता से अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार को देते हैं। उनका मानना है कि यह मंजिल अकेले उनकी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जिसने उनके सपने को अपना सपना मान लिया। वे यहीं नहीं रुकना चाहते आगे एमडी और पीएचडी जैसे उच्च अध्ययन को जारी रखने का उनका दृढ़ संकल्प है, ताकि वे अपनी योग्यता को और निखार सकें। परिवार के सदस्यों का सोच भविष्य में एक सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल खोलने के बड़े सपने पर टिकी हैं, जहां क्षेत्र के जरूरतमंद मरीजों को और बेहतर, और सुलभ इलाज मिल सके। यह सोच बताती है कि उनके लिए सफलता का मतलब खुद तक सीमित नहीं, बल्कि समाज तक फैला हुआ है।
"जो सपना मेरे परिवार ने देखा था, वह साकार हुआ है और असल में यह सफलता किसी एक की नहीं, हम सबकी है।" डॉक्टर हेमंत साहू के यह शब्द किसी भी संघर्षरत इंसान के लिए एक मशाल की तरह हैं। उन्होंने एक लक्ष्य तय किया, उसे पाने में पूरी शिद्दत से जुट गए, और आज परिणाम सबके सामने है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि यदि सपना सच्चा हो और साथ अपनों का मिल जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। गठुला की मिट्टी से निकला यह बेटा आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन चुका है जिद्द, जिजीविषा और परिवार के अटूट विश्वास की एक जीवंत मिसाल।
बजरंगपुर नवागांव में डॉक्टर हेमंत साहू की सेवा-यात्रा को और सशक्त बनाता है वहां स्थित जय अम्बे मेडिकल स्टोर, जो क्षेत्र के मरीजों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं। इलाज के साथ-साथ जरूरी दवाइयों की सहज उपलब्धता ही किसी भी स्वास्थ्य सेवा को पूर्णता देती है, और जय अम्बे मेडिकल स्टोर इसी कड़ी को जोड़ते हुए स्थानीय लोगों की सेवा में तत्पर रहता है। डॉक्टर साहब की ओपीडी और इस मेडिकल स्टोर की यह जुगलबंदी बजरंगपुर नवागांव और आसपास के गांवों के लिए स्वास्थ्य सुविधा को और भी सुलभ बना देती है।
सत्यदर्शन लाइव की ओर से डॉक्टर हेमंत कुमार साहू को उनकी इस उपलब्धि और समाज-सेवा की भावना के लिए हार्दिक सैल्यूट। ऐसे ही जज्बे और समर्पण की जरूरत हर गांव, हर घर को है।
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