- Post by Admin on Thursday, Aug 20, 2026
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कहते हैं इस संसार में जितने भी पशु प्राणी हैं वो भगवान के बनाए हुए हैं l इंसान हो या पशु, जानवर, सब में एक जान होती है l इनमें से किसी को भी चोट लगे तो दर्द सबको होता है तो आज मेरे मन में एक विचार आया कि एक गाय बकरा या मुर्गा जिसे इंसान मारकर खा जाते हैं उसी के लिए ये लाइन मैंने लिखी है कि एक पशु इंसान से कहता है कि हे मानव मैं जानता हूँ कि मुझे देखकर तेरी भूख बढ़ी है l क्या तेरी भूख मेरी जिंदगी या मेरे बच्चे से बढ़कर है l हां !
मेरा मांस खाकर तेरी भूख मिटती है तो मिटा ले पर मुझे जान से न मार क्योंकि मुझमें भी जान बसती है l मेरे शरीर के ऐसे अंग को काट कि मेरी जान न जाये और तेरी भूख भी मिट जाये l मैं तूझे मना नहीं करूँगा क्योंकि जब तू मेरा मांस खायेगा तब तू शराब पिएगा फिर अपने ही नशे में अपने बीवी या बच्चों की जान लेगा l तब मैं महसूस करूँगा तेरे अपने बिछड़ने का दर्द l मेरे भी बच्चे हैं जो भूख प्यास में रहते हैं मेरे घर आने का इंतज़ार करते हैं l
तू मानव है तू कुछ भी कर सकता है ? पर मैं एक बेजुबान जानवर हूँ,पशु हूँ,जिसे बोलना तो नहीं आता पर हर चीज़ महसूस होता है !हे मानव तू अपना भूख शांत कर पर मुझे जान से मत मार ! मुझे भी दर्द होता है मुझमें भी जान बसती है ...
प्रमोद ध्रुवंशी ये मेरा मौलिक लेख है
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