छत्तीसगढ़
राजकुमारी साहू का शुरुआती जीवन किसी आम साधनहीन ग्रामीण महिला की तरह अभावों के साए में बीता। परिवार में आय का कोई स्थायी जरिया नहीं था। जब गाँव में उम्मीद की सारी खिड़कियाँ बंद नजर आने लगीं, तो रोजगार के लिए उन्हें अपने परिवार के साथ अन्य राज्यों की ओर रुख करना पड़ा।
नेहरू नगर स्थित निर्मल ज्ञान मंदिर कबीर आश्रम में संत कबीरदास की 629वीं जयंती 28 जून, रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाई जाएगी
25 जून 2026 को अपनी स्थापना के 11 वर्ष पूर्ण करने जा रहा यह केंद्र आज छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजन सशक्तिकरण का एक सशक्त स्तंभ बन चुका है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सीआरसी राजनांदगांव की निदेशक महोदया द्वारा विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती पूजन के साथ किया गया। कार्यक्रम में डॉ. अनिल चंद्र, शिशु रोग विशेषज्ञ, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव तथा डॉ. वंदना, जिला सूक्ष्मजीव विज्ञानी (माइक्रोबायोलॉजिस्ट), राजनांदगांव मुख्य संसाधन व्यक्तियों के रूप में उपस्थित रहीं।
धीरेंद्र बबला साहू के जीवन में वह दौर भी आया जब माओवादी हिंसा ने उनके परिवार को गहरा घाव दिया। उनके पिता स्वर्गीय बबला साहू की असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। एक ऐसा दर्द, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो सकती। परिवार लंबे समय तक उस सदमे से उबरने की कोशिश करता रहा और भविष्य अनिश्चित दिखाई देने लगा था।