छत्तीसगढ़
वर्कशॉप में राजनांदगांव की प्रसिद्ध स्पीच थैरेपी विशेषज्ञ रजनी राठी ने अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कीं। उन्होंने बच्चों की समस्याओं का परीक्षण कर अभिभावकों को आवश्यक परामर्श दिया। साथ ही बच्चों के व्यवहार, भाषा विकास और संचार क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी साझा किए।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के राजमहल परिसर के सामने जब लोगों की नजर बांस से बनी एक झोपड़ी पर पड़ी, जो काली पन्नियों और प्लास्टिक में जकड़ी हुई थी, तो हर कोई कुछ पल के लिए ठहर गया। यह सिर्फ एक कला प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि ग्रामीण संस्कृति की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद का जीवंत चित्रण था।
मदर्स डे के इस विशेष अवसर पर शहर की प्रसिद्ध ब्यूटीशियन रश्मि हरिहारनो की कहानी हर उस महिला को प्रेरणा देती है, जो परिवार और अपने सपनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रश्मि ने यह साबित किया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो एक महिला घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी सफलता की नई ऊँचाइयों को छू सकती है।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव ने बीते कुछ वर्षों में एक नई पहचान बनाई है। इस बदलाव के केंद्र में हैं गांव की सरपंच श्रीमती पार्वती मंडावी, जिनकी सोच सिर्फ विकास तक सीमित नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने गांव को सिर्फ सुविधाओं से नहीं, बल्कि अवसरों से जोड़ने का कार्य किया है।
यह कहानी सिर्फ एक सरकारी योजना की नहीं, बल्कि एक बदलाव की शुरुआत है जहां डर की जगह विश्वास ले रहा है, और छुपाने की जगह इलाज सामने आ रहा है। “कुष्ठ मुक्त जिला” अब सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की उम्मीद बन गया है, जो स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जीना चाहता है।