बिजनेस /कारोबार
किसानों ने काली मिर्च, ऑस्ट्रेलियन टीक, हल्दी, एनाटो, सफेद मूसली और स्टीविया जैसी फसलों का अवलोकन किया तथा अश्वगंधा और कपिकच्छु के बीज निःशुल्क प्राप्त किए। बड़ी संख्या में किसानों ने जैविक पद्धति से जड़ी-बूटी खेती अपनाने का संकल्प लिया।
मेले में आए खरीदारों का कहना है कि इन हस्तनिर्मित बैगों की गुणवत्ता बड़े ब्रांड्स को भी टक्कर देती है, जबकि कीमतें सभी लोगों की पहुंच में हैं। स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की भावना के साथ लोग इन बैगों की खरीदारी कर रहे हैं
सुबह की पहली किरण के साथ खेतों से निकला किसान जब ई-रिक्शे में अपना ताज़ा उत्पाद लेकर मंडी पहुँचता है, तो उसके चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलकता है, क्योंकि अब उसके पास अपनी उपज को सही समय पर, सही दाम पर बेचने की ताकत है।
लोगों ने कहा, ये कुछ नहीं कर पाएगी पढ़ा-लिखाकर कोई फायदा नहीं। आज वही नूर सिर्फ 23 साल की उम्र में कॉरपोरेट जॉब के साथ ही अपना बिजनेस भी संभाल रही हैं।
जितेंद्र ने पूजा बोअर बकरी फार्म की स्थापना करके व्यवसाय की दुनिया में कदम रखा। यह फार्म दक्षिण अफ्रीकी बोअर बकरियों की विशेष नस्ल के लिए जाना जाता है।