गोपी साहू : आज जब हम शिक्षक दिवस मना रहे हैं, तो सिर्फ एक तारीख नहीं मना रहे हम उस परंपरा को नमन कर रहे हैं जिसने सदियों से इंसान को इंसान बनाया है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस हमें याद दिलाता है कि शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देता, वह जीवन जीने की कला सिखाता है। शिक्षा से बदलती दुनिया इतिहास गवाह है कि हर बड़ी क्रांति के पीछे एक विचार था, और हर विचार के पीछे एक शिक्षक।

जब समाज अंधविश्वास और अज्ञान के अंधेरे में डूबा था, तब शिक्षा ने ही दीये की तरह रास्ता दिखाया। आज विज्ञान और तकनीक ने जिस रफ्तार से दुनिया को बदला है, उसकी नींव भी कक्षाओं में ही रखी गई थी। एक विद्यार्थी जब प्रश्न पूछना सीखता है, तभी समाज आगे बढ़ता है।

शिक्षा केवल डिग्री और नौकरी का साधन नहीं, बल्कि सोच बदलने, समाज को जागरूक करने और राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव है। बदलती दुनिया में शिक्षक की भूमिका आज का युग डिजिटल है। मोबाइल, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सीखने के तरीके बदल दिए हैं, लेकिन शिक्षक की भूमिका आज भी उतनी ही अहम है, बल्कि पहले से ज्यादा जिम्मेदार हो गई है।

पहले शिक्षक सिर्फ जानकारी देता था, आज उसे बच्चों को यह सिखाना है कि सही जानकारी और गलत जानकारी में फर्क कैसे करें। सूचनाओं की बाढ़ में सही दिशा दिखाना ही आज के शिक्षक की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी सेवा है। आज का शिक्षक एक मार्गदर्शक है, जो बच्चों को सिर्फ परीक्षा पास कराने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की परीक्षाओं के लिए तैयार करता है।

संस्कार, ज्ञान और विज्ञान का संगम भारतीय शिक्षा परंपरा की सबसे बड़ी खूबसूरती यही रही है कि उसने कभी संस्कार को ज्ञान से अलग नहीं किया। गुरुकुल परंपरा में विद्यार्थी को वेद पढ़ाए जाते थे तो साथ ही सेवा, अनुशासन और नैतिकता भी सिखाई जाती थी। आज के दौर में जब विज्ञान हर दिन नई ऊंचाइयां छू रहा है, तब यह और भी जरूरी हो गया है कि हम विज्ञान के साथ संस्कार को भी न भूलें।

एक बच्चा अगर विज्ञान पढ़कर वैज्ञानिक बन जाए, लेकिन उसमें संवेदनशीलता, सम्मान और नैतिकता न हो, तो वह ज्ञान अधूरा है। सच्ची शिक्षा वही है जो सिर पर ज्ञान का प्रकाश डाले और हृदय में संस्कार के बीज बोए। विज्ञान हमें तकनीक देता है, लेकिन संस्कार हमें बताते हैं कि उस तकनीक का उपयोग किस दिशा में करना है मानवता की भलाई के लिए या विनाश के लिए। शिक्षक: राष्ट्र का निर्माता एक अच्छा शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा नहीं कराता, वह हर बच्चे में छिपी संभावना को पहचानता है और उसे तराशता है। वह असफलता से घबराए बच्चे को हिम्मत देता है, गरीब परिवार के बच्चे को सपने देखना सिखाता है, और भटके हुए विद्यार्थी को सही राह दिखाता है।

यही शिक्षक कल के डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, पत्रकार और नेता गढ़ते हैं। शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों को धन्यवाद कहने का दिन नहीं है, यह आत्ममंथन का भी दिन है कि क्या हम अपने शिक्षकों द्वारा दिए गए ज्ञान और संस्कारों को आगे बढ़ा रहे हैं? बदलती दुनिया में भले ही तकनीक शिक्षक की जगह लेने की कोशिश करे, लेकिन शिक्षक का स्थान कोई मशीन नहीं ले सकती, क्योंकि शिक्षक सिर्फ सूचना नहीं देता, वह जीवन गढ़ता है।

आइए, इस शिक्षक दिवस पर हम सब मिलकर संकल्प लें ज्ञान को विज्ञान से जोड़ें, विज्ञान को संस्कार से जोड़ें, और इस त्रिवेणी से एक ऐसे भारत का निर्माण करें जो ज्ञानवान भी हो और संस्कारवान भी।

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