कमलेश यादव : सावन आते ही मानो प्रकृति ने हरी चुनरी ओढ़ ली हो। खेत खलिहान, पेड़-पौधे सब कुछ हरियाली की चादर में लिपट जाते हैं। आसमान में काले घने बादल यूं घूमते हैं जैसे कोई विशाल कारवां चला जा रहा हो। हवा में मिट्टी की वो पहली बारिश की सोंधी खुशबू घुल जाती है, जो दिल को अंदर तक सुकून से भर देती है। यही वो महीना है जब धरती अपनी प्यास बुझाकर फिर से जीवंत हो उठती है।

गांव की गलियों में बच्चे भीगते हुए दौड़ लगाते हैं, कागज की नावें बनाकर नालियों में तैराते हैं। पेड़ों की डालियों पर झूले पड़ जाते हैं और युवतियां "सावन के झूले" गाते हुए झूला झूलती हैं। कजरी और सावनी गीतों की मिठास हर आंगन में गूंज उठती है। यह वो दृश्य है जो सीधा दिल को छू जाता है, क्योंकि इसमें बचपन की मासूमियत और अपनेपन की खुशबू बसी होती है।

सावन सिर्फ बारिश का मौसम नहीं, बल्कि आस्था और भक्ति का महीना भी है। हर तरफ "बोल बम" के जयकारे गूंजते हैं। कांवड़िए कंधे पर कांवड़ लिए, नंगे पांव, श्रद्धा से भरे हुए शिवधाम की ओर चल पड़ते हैं। शिवालयों में घंटियों की आवाज और "ॐ नमः शिवाय" का जाप वातावरण को पवित्र बना देता है। यह भक्ति भाव देखकर लगता है कि मानो पूरा समाज एक डोर में बंध गया हो।

सावन की सुबह जब मंदिर की ओर महिलाएं निकलती हैं, तो यह दृश्य बहुत सुंदर लगता है। हाथों में सजी पूजा की थाली में लाल गुलाल, धूप-दीप, दूब और बेलपत्री करीने से सजाए होते हैं, साथ ही गेंदे और कनेर के ताज़े फूलों की महक वातावरण को और पावन बना देती है। माथे पर चमकती बिंदिया और मांग में सिंदूर की लाली उनके श्रद्धा भाव को और निखार देती है। पग-पग चलते हुए वे "जय शिव शंकर" गुनगुनाती हैं, कोई कलश में जल भरे तो कोई थाली में अक्षत और बताशे सजाए, मानो हर हाथ में सावन की भक्ति साकार हो उठी हो। यह केवल पूजा का नहीं, बल्कि भारतीय स्त्री की आस्था, श्रृंगार और परंपरा के अनोखे संगम का प्रतीक बन जाता है।

बारिश की बूंदें जब पत्तों पर गिरती हैं, तो एक अलग ही संगीत सुनाई देता है। खेतों में किसान हल चलाते हुए धान की रोपाई करते हैं, उनके चेहरे पर एक संतोष और उम्मीद की चमक होती है, क्योंकि यही महीना उनकी मेहनत को नई फसल में बदलने वाला होता है। सावन की हरियाली सिर्फ आंखों को नहीं, बल्कि पूरे मन को तृप्त कर देती है।

सावन का यह महीना प्रेम, मिलन और स्मृतियों का भी प्रतीक है। कोई प्रियजन दूर हो तो उसकी याद और गहरी हो जाती है, और जो पास हों उनके साथ का हर पल और अनमोल लगने लगता है। बादलों की गड़गड़ाहट में, बारिश की फुहारों में और मिट्टी की खुशबू में जैसे पूरी जिंदगी की सादगी और सुंदरता समा जाती है। यही तो सावन की असली पहचान है प्रकृति, भक्ति और भावनाओं का एक अनूठा संगम।

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