- Post by Admin on Monday, Sep 28, 2026
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रात के ढाई बज रहे थे। बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में पिछले एक दिन से आसमान बरस रहा था और नदी-नाले उफान पर थे। गंडई के दनिया पुल पर पुलिस के जवान सड़क पर स्टॉपर लगाकर पहरा दे रहे थे।
उनका काम एक ही था कि कोई इस उफनते पानी में न उतरे। तभी रायपुर की ओर से आती एक स्विफ्ट डिजायर की हेडलाइट अंधेरे को चीरती दिखी। कार में पांच दोस्त थे, रायपुर और भिलाई के। वे कान्हा किसली घूमने निकले थे, मन में छुट्टी की उमंग लिए।
उन्हें अंदाजा नहीं था कि आगे की राह पर मौत बह रही है। पुल पर पहुंचकर कार रुकी नहीं। स्टॉपर से टकराई और पानी में आगे बढ़ गई। दूसरे छोर पर खड़े जवान चिल्लाए और रुकने का इशारा किया, पर तब तक देर हो चुकी थी।
बाढ़ का बहाव कार को अपने साथ बहा ले गया और उसे नदी के बीचोंबीच ले जाकर फंसा दिया। चारों तरफ घना अंधेरा था, कान में सिर्फ पानी की गर्जना, और नीचे बहती नदी। कार में बैठे पांचों दोस्तों की सांसें थम गई थीं।
किसी तरह उन्होंने खुद को संभाला और एक पेड़ का सहारा लेकर टिके रहे। कांपते हाथों से उन्होंने फोन उठाया और 112 डायल किया। उस पल में वह नंबर उनके लिए जिंदगी की आखिरी डोर था।
फोन की घंटी बजी और मदद की पुकार गंडई थाने तक पहुंच गई। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी शिवांकर गिनडले अपनी टीम के साथ दौड़ पड़े। सामने भारी बारिश थी, रात का अंधेरा था और नदी का तेज बहाव था।
किसी भी पल कुछ भी हो सकता था। लेकिन उस रात वर्दी के सामने एक ही सवाल था कि पांच जिंदगियां पानी के बीच फंसी हैं और उन्हें निकालना है। टीआई गिनडले और उनकी टीम ने खुद को जोखिम में डालकर पानी में उतरने का फैसला किया।
एक-एक कदम बढ़ाते हुए, बहाव से जूझते हुए वे उन तक पहुंचे। और फिर एक-एक करके पांचों को सुरक्षित बाहर निकाल लाए। किनारे पर पहुंचते ही कमलेश साहू, कुबेर साहू, निहाल सक्सेना, महक कौर और प्रीति रात्रे ने राहत की सांस ली। कुछ देर पहले जो नदी उन्हें निगलने को तैयार थी, अब वह पीछे छूट चुकी थी।
पुलिस ने सभी को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गंडई पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद सभी सुरक्षित बताए गए हैं। कान्हा की सैर अधूरी रह गई, पर पांचों घर लौट सकेंगे। उस रात एक फोन कॉल और कुछ जवानों की हिम्मत ने पांच परिवारों की खुशियां बचा लीं।
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