कारवी यादव : किसी मां के लिए इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई हो, जब उसका बच्चा बोलना चाहता हो लेकिन शब्द उसके होंठों तक आकर ठहर जाएं। आंखों में भाव हों, मन में इच्छाएं हों, पर आवाज साथ न दे। ऐसे ही अनगिनत घरों की खामोशी को मुस्कान में बदलने का कार्य पिछले दस वर्षों से राजनांदगांव की जानी-मानी स्पीच थैरेपी विशेषज्ञ एवं स्पेशल एजुकेटर रजनी राठी कर रही हैं। इस मदर्स डे पर उनकी कहानी केवल एक प्रोफेशनल की नहीं, बल्कि उन हजारों माताओं की उम्मीद की कहानी है, जिनके बच्चों को उन्होंने शब्दों का संसार लौटाया।

राजनांदगांव के मानव मंदिर चौक के पास स्थित उनके सेंटर में हर दिन उम्मीद दस्तक देती है। कोई बच्चा हकलाहट से जूझ रहा होता है, कोई ऑटिज्म के कारण अपनी बात व्यक्त नहीं कर पाता, तो कोई जन्म से ही बोलने में कठिनाई महसूस करता है। ऐसे बच्चों के लिए रजनी राठी सिर्फ एक थैरेपिस्ट नहीं, बल्कि धैर्य, स्नेह और विश्वास का दूसरा नाम बन चुकी हैं। उनकी मधुर मुस्कान और अपनापन बच्चों के मन का डर धीरे-धीरे खत्म कर देता है।

बीते दस वर्षों में वे 1000 से अधिक बच्चों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला चुकी हैं। कई ऐसे बच्चे, जिन्हें लोग “शायद कभी बोल नहीं पाएंगे” कहकर निराश हो चुके थे, आज स्पष्ट शब्दों में अपने माता-पिता को “मां” और “पापा” कहकर पुकार रहे हैं। जब किसी बच्चे की पहली आवाज उसके माता-पिता के कानों तक पहुंचती है, वह पल किसी चमत्कार से कम नहीं होता। उन भावुक क्षणों में कई मांओं की आंखों से खुशी के आंसू बह पड़ते हैं।

मदर्स डे के अवसर पर रजनी राठी की भूमिका और भी विशेष हो जाती है, क्योंकि वे केवल बच्चों का परामर्श नहीं करतीं, बल्कि माताओं को भी मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं। कई बार निराश हो चुकी मांओं को वे समझाती हैं कि हर बच्चा अपनी गति से आगे बढ़ता है। उनका कहना है कि “एक मां का धैर्य और प्यार ही बच्चे की सबसे बड़ी ताकत होता है।” यही कारण है कि उनके सेंटर से जुड़ी माताएं उन्हें एक विशेषज्ञ के साथ-साथ परिवार के सदस्य जैसा सम्मान देती हैं।

रजनी राठी का मानना है कि हर बच्चे के भीतर एक अनोखी प्रतिभा छिपी होती है, बस उसे सही दिशा और संवेदनशील सहयोग की जरूरत होती है। वे आधुनिक तकनीकों और विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों के संचार कौशल को विकसित करने में लगातार कार्य कर रही हैं। उनका यह समर्पण केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति सेवा का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

आज जब पूरा देश मदर्स डे मना रहा है, तब राजनांदगांव की यह बेटी अनगिनत घरों में मुस्कान और आवाज का कारण बनी हुई है। जिन बच्चों के शब्द कभी अधूरे थे, आज वही बच्चे आत्मविश्वास के साथ दुनिया से संवाद कर रहे हैं। सच कहा जाए तो रजनी राठी उन माताओं के सपनों की वह रोशनी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों की आवाज खोने नहीं दी।

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