- Post by Admin on Monday, Jul 20, 2026
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कमलेश यादव ; गांवों की पहचान केवल खेत-खलिहानों और सादगी से नहीं होती, बल्कि उन लोगों से होती है जो अपने कर्मों से पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसे ही छोटे से गांव रातापयली की मिट्टी ने एक ऐसे चिकित्सक को जन्म दिया, जिन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा को अपना धर्म बना लिया। आज यह गांव इसलिए भी जाना जाता है क्योंकि यहां एक डॉक्टर बिना किसी भेदभाव के लोगों का निःशुल्क उपचार कर मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं।
डॉ. एस.के. (सुदर्शन) देवांगन डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस विचार को अपने जीवन में साकार कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि "जब पढ़-लिखकर काबिल बन जाओ, तब उस समाज को मत भूलना, जहां से तुम आए हो।" पिछले 12 वर्षों से वे रातापयली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद मरीजों का निःशुल्क इलाज कर रहे हैं। उनके लिए चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है।
डॉ. देवांगन के जीवन की राह आसान नहीं रही। बचपन में हुए एक दर्दनाक हादसे में उनकी एक आंख की रोशनी चली गई। इलाज के लिए उन्हें कई जगह भटकना पड़ा और उस कठिन दौर ने उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों से परिचित कराया। उसी समय उन्होंने मन में संकल्प लिया कि यदि डॉक्टर बनने का अवसर मिला तो वे ऐसी जगह अपनी सेवाएं देंगे, जहां लोगों को अच्छे इलाज की सबसे अधिक जरूरत हो।
अपने इसी संकल्प को साकार करते हुए डॉ. सुदर्शन देवांगन आज तक अनेक जरूरतमंद मरीजों का निःशुल्क उपचार कर चुके हैं। उनके क्लिनिक में आने वाले मरीजों के लिए वे केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद सहारा हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए उनकी सेवा किसी वरदान से कम नहीं है। उनकी विनम्रता, सरल व्यवहार और सेवा भावना ने उन्हें लोगों के दिलों में विशेष स्थान दिलाया है।
डॉ. देवांगन अपनी इस सेवा यात्रा में डॉ. खिलेश यारदा से निरंतर प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उनका मानना है कि एक डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान उसकी डिग्री नहीं, बल्कि मरीज के चेहरे पर लौटने वाली मुस्कान होती है। यही सोच उन्हें हर दिन नई ऊर्जा के साथ समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करती है।
आज डॉ. सुदर्शन देवांगन यह साबित कर रहे हैं कि जीवन की कठिनाइयां यदि संकल्प में बदल जाएं, तो वही व्यक्ति दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। अपनी व्यक्तिगत पीड़ा को समाज की सेवा में बदलने वाले ऐसे चिकित्सक वास्तव में मानवता के सच्चे प्रहरी हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि सफलता का सबसे सुंदर रूप वही है, जो समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सके।
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