- Post by Admin on Tuesday, Aug 11, 2026
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कमलेश: देशभर में आजादी के 80वें वर्ष को धूमधाम से मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी कड़ी में सत्यदर्शन लाइव की टीम पहुंची छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित बैगाटोला गांव, जहां प्रगतिशील भारत की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिलती है। बरसात के इस मौसम में गांव के खेत-खलिहान हरियाली की चादर ओढ़े नजर आते हैं, गांव की गलियों में मवेशियों के गले की घंटियों की आवाज गूंजती है और चौपाल पर बुजुर्गों की चर्चा शुरू हो जाती है। कच्चे-पक्के मकानों के बीच अब सीमेंट की सड़कें भी झांकने लगी हैं, जो कभी बरसात में कीचड़ से सराबोर रहती थीं। परंपरा और आधुनिकता का यह संगम आज के भारत की असली तस्वीर पेश करता है।
गौरतलब है कि, इस बदलाव की कहानी के केंद्र में हैं गांव के सरपंच कमल नारायण साहू, जिनकी दूरदृष्टि और जमीनी स्तर पर मेहनत ने बैगाटोला की सूरत बदलनी शुरू कर दी है। सरपंच साहू का मानना है कि विकास सिर्फ योजनाओं के कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव के हर नागरिक की जिंदगी में उसका असर दिखना चाहिए। वे खुद निर्माण स्थलों का निरीक्षण करते हैं, ग्रामसभा में लोगों की समस्याएं सुनते हैं और हर काम को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी लेते हैं। उनका सोचना है कि आजादी के 80 साल बाद अब गांवों को आत्मनिर्भर बनने का समय आ गया है, और इसकी शुरुआत बुनियादी सुविधाओं से ही होगी।
गांव में हुए निर्माण कार्यों की फेहरिस्त इस सोच का जीता-जागता प्रमाण है। छोटे तालाब के किनारे पचरी निर्माण से महिलाओं और ग्रामीणों को पानी तक सुगम पहुंच मिली है, जिससे रोजमर्रा का जीवन आसान हुआ है। समरसता भवन के पास डोम शेड और कर्मा भवन के पास शेड निर्माण से सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों को नया ठिकाना मिला है, जहां अब शादी ब्याह से लेकर सामुदायिक कार्यक्रम तक बिना किसी असुविधा के आयोजित हो पा रहे हैं।
पर्यावरण और स्वच्छता को लेकर भी गांव में गंभीरता से काम हुआ है। निश्तारी तालाब में ग्रे वाटर फिल्टर सिस्टम लगाकर गंदे पानी को तालाब में मिलने से रोका गया है, जबकि तालाब की सफाई कर गंदे पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था की गई है। इससे न सिर्फ जल स्रोत सुरक्षित हुआ है, बल्कि गांव के जलस्तर और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। यह दर्शाता है कि सरपंच साहू का विकास मॉडल केवल निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बैगाटोला ने कदम बढ़ाए हैं। माध्यमिक शाला में शौचालय निर्माण से खासकर छात्राओं की उपस्थिति और सहूलियत बढ़ी है, जो कि स्वच्छ भारत मिशन की मूल भावना के अनुरूप है। इसके साथ ही स्कूल परिसर में पेवर ब्लॉक बिछाए जाने से बरसात के दिनों में भी बच्चों को कीचड़ से जूझे बिना विद्यालय आना-जाना आसान हो गया है। ये छोटे-छोटे बदलाव आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा फर्क साबित हो रहे हैं।
आजादी के 80वें वर्ष में जब पूरा देश तिरंगे के रंग में रंगने की तैयारी कर रहा है, बैगाटोला जैसे गांव यह साबित कर रहे हैं कि असली विकास तभी सार्थक है जब वह गांव-गांव, गली-गली तक पहुंचे। सरपंच कमल नारायण साहू के नेतृत्व में यह गांव लोगों की सोच और उम्मीदों में भी बदलाव ला रहा है।
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