- Post by Admin on Friday, May 08, 2026
- 308 Viewed
![]()
कमलेश यादव : माँ… केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह एहसास है जो टूटते मन को सहारा देता है, अंधेरे में रोशनी बनता है और हर परिस्थिति में अपने बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़ा रहता है। जीवन की भागदौड़ में भले ही लोग व्यस्त हो जाएं, लेकिन माँ का चेहरा, उसकी ममता और उसका त्याग कभी धुंधला नहीं पड़ता। मदर्स डे मानो फिर से उसी वात्सल्य की गोद में ले जाकर खड़ा कर देता है, जहाँ निस्वार्थ प्रेम बसता है। एक माँ अपने सपनों को पीछे रखकर बच्चों के भविष्य को संवारती है, और यही त्याग उसे संसार का सबसे सुंदर रूप बनाता है।
मदर्स डे के इस विशेष अवसर पर शहर की प्रसिद्ध ब्यूटीशियन रश्मि हरिहारनो की कहानी हर उस महिला को प्रेरणा देती है, जो परिवार और अपने सपनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रश्मि ने यह साबित किया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो एक महिला घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी सफलता की नई ऊँचाइयों को छू सकती है।
एक कुशल गृहिणी के रूप में उन्होंने अपने परिवार को हमेशा प्राथमिकता दी। घर की छोटी-बड़ी जिम्मेदारियाँ हों या बच्चों की परवरिश, उन्होंने हर भूमिका को पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निभाया। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपने हुनर को भी पहचान दी और ब्यूटी इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। आज शहर में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
रश्मि हरिहारनो कहती हैं, “मेरे तीनो बच्चे मेरी आँखें हैं, जिनसे मैं अपने आगे का रास्ता देखती हूँ।” यह केवल एक माँ के शब्द नहीं, बल्कि उस गहरे भाव का परिचय है जिसमें माँ अपने बच्चों में ही अपना भविष्य, अपनी उम्मीद और अपनी दुनिया देखती है। उनके लिए सफलता का अर्थ केवल आगे बढ़ना नहीं, बल्कि बच्चों को अच्छे संस्कार और बेहतर जीवन देना भी है।
उन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। कई बार परिस्थितियाँ कठिन हुईं, समय कम पड़ा, जिम्मेदारियाँ बढ़ीं, फिर भी उन्होंने मुस्कुराकर हर चुनौती को स्वीकार किया। यही कारण है कि आज एक सफल ब्यूटीशियन ही नहीं, बल्कि अनेक महिलाओं के लिए आत्मविश्वास और संघर्ष की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं।
रश्मि की कहानी यह संदेश देती है कि माँ केवल घर संभालने वाली महिला नहीं होती, बल्कि वह परिवार की सबसे बड़ी शक्ति होती है। वह बच्चों के सपनों को उड़ान देने के साथ-साथ अपने सपनों को भी नई दिशा दे सकती है। जरूरत केवल आत्मविश्वास, मेहनत और परिवार के प्रति समर्पण की होती है।
मदर्स डे पर ऐसी सभी माताओं को सलाम, जो अपने संघर्षों को मुस्कान में छिपाकर परिवार को खुशियाँ देती हैं। रश्मि हरिहारनो जैसी महिलाएँ समाज को यह सिखाती हैं कि एक माँ जब ठान ले, तो वह अपने प्यार, त्याग और मेहनत से हर मुश्किल को आसान बना सकती है। सच ही कहा गया है माँ केवल जन्म नहीं देती, वह हर दिन अपने परिवार के लिए एक नया जीवन गढ़ती है।
अन्य समाचार
पंचायतनामा : आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ता एक आदर्श गांव
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव ने बीते कुछ वर्षों में एक नई पहचान बनाई है। इस बदलाव के केंद्र में हैं गांव की सरपंच श्रीमती पार्वती मंडावी, जिनकी सोच सिर्फ विकास तक सीमित नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने गांव को सिर्फ सुविधाओं से नहीं, बल्कि अवसरों से जोड़ने का कार्य किया है।
Read More...
एकजुट प्रयास, स्वस्थ भविष्य...कुष्ठ मुक्त भारत की ओर कदम
यह कहानी सिर्फ एक सरकारी योजना की नहीं, बल्कि एक बदलाव की शुरुआत है जहां डर की जगह विश्वास ले रहा है, और छुपाने की जगह इलाज सामने आ रहा है। “कुष्ठ मुक्त जिला” अब सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की उम्मीद बन गया है, जो स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जीना चाहता है।
Read More...
रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर: बस्तर को मिलेगी ग्लोबल कनेक्टिविटी की रफ्तार
रायपुर विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से गुजर रहा है. जगदलपुर मुख्यालय को इस कॉरिडोर से जोड़ने के लिए ओडिशा के नबरंगपुर का दासपुर इंटरचेंज महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा
Read More...
छत्तीसगढ़ में 2292 सहायक शिक्षक पदों पर भर्ती शुरू, अक्टूबर में परीक्षा संभावित
छत्तीसगढ़ में शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। पहले चरण में सहायक शिक्षक के 2292 पदों पर नियुक्ति की जाएगी।
Read More...
सिर्फ जीएं नहीं, किसी और को जीने का मौका भी दें...रक्तवीर जितेंद्र साहू न केवल खुद हर तीन महीने में रक्तदान करते हैं, बल्कि रक्तदान शिविरों के आयोजन और जागरूकता फैलाने में भी पूरी निष्ठा से जुटे रहते हैं
हम सबके शरीर में बहता यह रक्त ईश्वर का दिया हुआ अमूल्य उपहार है। अगर यही रक्त किसी की रुकती सांसों को फिर से चला दे, तो इससे बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता
Read More...
सेना की सेवा से जनसेवा तक: पूर्व सैनिक राकेश कुमार सोनी बने जिला संयोजक रायपुर शहर भाजपा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके भीतर अपनी मातृभूमि और गांव की मिट्टी के प्रति गहरा लगाव बना हुआ है। वे मानते हैं कि जिस धरती ने उन्हें जन्म दिया, उसी के विकास और लोगों की सेवा करना उनका कर्तव्य है।
Read More...
स्पेशल एजुकेटर मेघा तिवारी को मिला राज्य स्तरीय "छत्तीसगढ़ महतारी सम्मान"...एक माँ, एक गृहिणी और एक संघर्षशील महिला के रूप में उन्होंने हर चुनौती का सामना किया
रायपुर के वृंदावन हॉल में नवसृजन मंच द्वारा आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में प्रदेश के 22 जिलों से प्राप्त प्रविष्टियों में से मेघा तिवारी का चयन विशेष बच्चों के लिए किए गए उनके उत्कृष्ट एवं समर्पित कार्यों के आधार पर किया गया।
Read More...
एक स्टेशन एक उत्पाद: इको-फ्रेंडली बैग में झलकती परंपरा, यात्रियों को भा रहा स्थानीय हुनर
केंद्र शासन की महत्वाकांक्षी योजना “एक स्टेशन एक उत्पाद” के अंतर्गत राजनांदगांव रेलवे स्टेशन पर स्टॉल में इन बैगों की खास प्रदर्शनी की गई है। यहां से गुजरने वाले यात्री न केवल इन बैगों को देख रहे हैं बल्कि बड़ी संख्या में खरीद भी रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि ये बैग पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बेहद आकर्षक और मजबूत भी हैं।
Read More...
महतारी वंदन योजना से सशक्त हुई माँ, बेटी के सुनहरे भविष्य की रखी मजबूत नींव
माँ का सपना हमेशा अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा होता है। जब किसी योजना से एक माँ को अपने बच्चे के सपनों को संवारने की ताकत मिलती है, तब वह योजना समाज में बदलाव की मिसाल बन जाती है। महतारी वंदन योजना ने ऐसी ही एक माँ के जीवन में उम्मीद, आत्मविश्वास और भविष्य की नई राह दिखाई है।
Read More...
उड़ान ...दो अलग-अलग मंचों पर स्पीच थैरेपी विशेषज्ञ रजनी राठी का हुआ सम्मान
स्पीच थैरेपी विशेषज्ञ एवं स्पेशल एजुकेटर रजनी राठी को समाजसेवा और विशेष बच्चों के विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दो अलग-अलग कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया।
Read More...