- Post by Admin on Sunday, May 03, 2026
- 181 Viewed
![]()
मैं हूँ…रात की तरह गहरी,पर भीतर उजाले की एक लौ लिए जो हर अंधेरे को चुनौती देती है।
रास्ते आसान नहीं थे,हर मोड़ पर ठोकरें मिलीं,कभी सपनों ने साथ छोड़ा,तो कभी अपनों ने समझा नहीं।
पर मैंने सीखा है दर्द को छुपाना नहीं,उसे अपनी ताकत बनाना है,आंसुओं को बहाना नहीं,उन्हें अपने इरादों में ढालना है।
संघर्ष मेरे साथी हैं,जो मुझे गिराते नहीं,हर बार कुछ नया सिखाते हैं,हर हार में एक नई जीत का बीज बो जाते हैं।
मैं रुकी नहीं…क्योंकि रुकना मेरी फितरत नहीं,मैं झुकी नहीं…क्योंकि झुकना मेरी आदत नहीं।
मैंने अपने जख्मों से हीहिम्मत का दीप जलाया है,हर दर्द को सीढ़ी बनाकरखुद को और ऊँचा उठाया है।
आज भी सफर जारी है,मंज़िलें अभी बाकी हैं,पर यकीन है मुझे मेरे कदम कभी थमेंगे नहीं।
क्योंकि मैंने सीख लिया है संघर्षों को गले लगाकर,दर्द को ताकत बनाकर,हर हाल में आगे बढ़ने की कला।
यह कहानी अभी खत्म नहीं,यह तो बस शुरुआत है—एक नई उड़ान की, एक नए आसमान की।
रजनी जोशी
अन्य समाचार
मैं मज़दूर मुझे देवों की बस्ती से क्या
रामधारी सिंह दिनकर साहित्य के वह सशक्त हस्ताक्षर हैं जिनकी कलम में दिनकर यानी सूर्य के समान चमक थी। उनकी कविताएं सिर्फ़ उनके समय का सूरज नहीं हैं बल्कि उसकी रौशनी से पीढ़ियां प्रकाशमान होती हैं।
Read More...
समसामयिक विषय...सूखते दरख़्त, बुझती नदियाँ: इंसान कब समझेगा अपनी भूल...जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन की भयावह तस्वीर
आज पूरा देश प्रचंड गर्मी की चपेट में है, लेकिन यह संकट अचानक नहीं आया। एक ओर हम “पेड़ लगाओ” का नारा लगाते हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जारी है।
Read More...
हमने जंगलों को काटकर कंक्रीट के जंगल बो दिए,और फिर AC में बैठकर बोले “बहुत गर्मी है
अप्रैल ही तो है…पर लगता है जैसे सूरज ने जून से उधार ले ली हो आग,धरती तप रही है यूँ… जैसे किसी ने रख दी हो उस पर नाराज़गी की राख।
Read More...
जब खैरागढ़ से उठी कला की गूंज, और थाईलैंड तक पहुँची भारत की पहचान
मो. आसिफ हुसैन, राजेंद्र कुमार, तोषिता असाटी, मधुश्मिता पॉल और एक्कलक नू नगियोन ने जैसे ही अपनी प्रस्तुतियाँ शुरू कीं, हर नजर उन पर टिक गई। उनके हर भाव, हर सुर और हर कदम में भारतीय संस्कृति की गहराई झलक रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे भारत की आत्मा स्वयं उस मंच पर जीवंत हो उठी हो।
Read More...
डॉ. शुभा मिश्रा और गजेंद्र कुमार साहू सरस्वती साहित्य नव लेखक सम्मान से सम्मानित
विमतारा सभागार रायपुर में सरस्वती बुक्स व श्रीसाईनाथ फाउंडेशन के द्वारा आयोजित सरस्वती साहित्य सम्मान समारोह में डॉ. शुभा मिश्रा और गजेंद्र कुमार साहू को सरस्वती साहित्य नव लेखक सम्मान से सम्मानित किया गया
Read More...
उपन्यास गांव खेड़ा मौहा भाठा : सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं, किंतु वास्तविक जीवन में नौकरशाही से सत्य इतना परेशान हो जाता है कि हर किसी के लिए लड़ना और सत्य का दामन थामे रखना आसान नहीं होता
उपन्यास में अंत तक यह जिज्ञासा बनी रही कि क्या जयमती आखिर तक सत्य के लिए लड़ेगी या परिस्थितियों से समझौता कर सिस्टम का हिस्सा बन जाएगी।
Read More...
स्व. कुलदीप सिंह साहू स्मृति सम्मान समारोह साहू मित्र सभागार भिलाई में
यह कार्यक्रम लोक कला एवं साहित्य संस्था सिरजन तथा साहित्य प्रकोष्ठ साहू मित्र सभा के संयुक्त तत्वावधान में साहू मित्र सभा सभागार में शुक्रवार 13 तारीख को संध्या 4 बजे आयोजित की जाएगी।
Read More...
रंग-बिरंगी, भावपूर्ण और मन को छू लेने वाली कविताओं का सुंदर संग्रह ...चम्पेश्वर गिरि गोस्वामी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक का भव्य विमोचन
जब एक रचनाकार अपने अनुभवों, भावनाओं और सपनों को कागज़ पर उतारता है, तो वह केवल पुस्तक नहीं, बल्कि पाठकों के लिए एक प्रेरक यात्रा रचता है
Read More...
दिमाग पढ़ने वाली चिप! वैज्ञानिकों ने बनाई सोच को आवाज में बदलने वाली तकनीक, बिना बोले भी कह पाएंगे अपनी बात
दिमाग पढ़ने वाली यह नई चिप टेक्नोलॉजी इंसान और मशीन के रिश्ते को पूरी तरह बदल सकती है. अभी यह शुरुआती दौर में है, लेकिन जिस तरह से Artificial Intelligence और Machine Learning इसमें जुड़ रही है, वह दिन दूर नहीं जब हम बिना बोले, बिना लिखे सिर्फ सोचकर बातचीत कर पाएंगे.
Read More...
मनखे-मनखे एक समान : अगर हम सच बोलना, न्याय करना और प्रेम बाँटना सीख लें, तो समाज अपने आप बदल सकता है
बाबा गुरु घासीदास जी ने जंगलों, खेतों और साधारण जीवन के बीच उन्होंने सत्य, अहिंसा और समानता को व्यवहार में उतारा। उनके लिए धर्म का अर्थ पूजा नहीं, बल्कि इंसान को इंसान समझना था।
Read More...