- Post by Admin on Thursday, Jun 04, 2026
- 173 Viewed
![]()
कमलेश यादव : कई लोग जीवन में धन, पद और प्रसिद्धि के सपने देखते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने सपनों में दूसरों का भविष्य संवारने की चाह रखते हैं। कर्नाटक के 79 वर्षीय अंके गौड़ा ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य किताबों को लोगों तक पहुंचाना बनाया। जिस व्यक्ति ने बचपन में किताबों की कमी का दर्द झेला, उसी ने आगे चलकर लाखों किताबों का ऐसा संसार खड़ा कर दिया, जो आज हजारों विद्यार्थियों और शोधार्थियों के सपनों को पंख दे रहा है।
मांड्या जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अंके गौड़ा का बचपन अभावों के बीच बीता। उस समय गांवों में किताबें आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। पढ़ने की ललक तो थी, लेकिन संसाधन सीमित थे। कई बार उन्हें केवल एक पुस्तक पाने के लिए दूर-दूर तक सफर करना पड़ता था। यही संघर्ष उनके मन में एक संकल्प बनकर बस गया कि भविष्य में किसी बच्चे को केवल गरीबी या संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़े।
जीवन आसान नहीं था। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उन्होंने बस कंडक्टर से लेकर चीनी मिल कर्मचारी, दूध विक्रेता और बीमा एजेंट तक कई काम किए। आमदनी सीमित थी, लेकिन किताबों के प्रति उनका प्रेम असीम था। वे अपनी जरूरतों में कटौती कर लेते, लेकिन जहां भी कोई अच्छी पुस्तक दिखाई देती, उसे अपने संग्रह में शामिल करने का प्रयास जरूर करते। उनके लिए हर किताब केवल कागज का पुलिंदा नहीं, बल्कि किसी के उज्ज्वल भविष्य की संभावना थी।
धीरे-धीरे यह शौक एक मिशन में बदल गया। वर्षों तक उन्होंने दुर्लभ पुस्तकें, पत्रिकाएं, शोध सामग्री, शब्दकोश और विभिन्न भाषाओं के साहित्य को एकत्रित किया। उनके घर का हर कोना किताबों से भरने लगा। परिवार ने भी इस जुनून को समझा और उनका साथ दिया। समय के साथ यह संग्रह इतना विशाल हो गया कि उसने एक भव्य पुस्तकालय का रूप ले लिया।
आज "पुस्तक माने" नाम से प्रसिद्ध यह पुस्तकालय लगभग 20 लाख पुस्तकों का खजाना बन चुका है। यहां स्कूली बच्चों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा, शिक्षक, शोधार्थी और ज्ञान के प्यासे लोग निःशुल्क अध्ययन कर सकते हैं। अंके गौड़ा, उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी और पुत्र सागर स्वयं इस पुस्तकालय की देखभाल करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर आगंतुक को ज्ञान का यह खजाना खुले दिल से उपलब्ध हो।
उनकी इस अद्भुत सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री सम्मान से अलंकृत किया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है जो मानती है कि समाज की सबसे बड़ी पूंजी शिक्षा और ज्ञान है। अंके गौड़ा ने यह साबित कर दिया कि बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े संकल्प की आवश्यकता होती है।
अंके गौड़ा की कहानी हमें सिखाती है कि यदि किसी व्यक्ति के भीतर समाज के लिए कुछ करने की सच्ची भावना हो, तो साधारण परिस्थितियां भी असाधारण परिणाम पैदा कर सकती हैं। एक समय जो बालक किताबों की तलाश में मीलों चलकर जाता था, आज उसने ऐसा ज्ञान मंदिर खड़ा कर दिया है जहां लाखों संभावनाएं जन्म ले रही हैं। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि एक अच्छी किताब केवल जीवन नहीं बदलती, बल्कि उससे जुड़ा एक संकल्प पूरे समाज का भविष्य बदल सकता है।
स्रोत:
'कभी बस कंडक्टर रहे, अब पद्म पुरस्कार विजेता: अंके गौड़ा कौन हैं, वो व्यक्ति जिन्होंने 20 लाख किताबों के साथ भारत का सबसे बड़ा मुफ्त पुस्तकालय बनाया' - इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा 25 जनवरी 2026 को प्रकाशित।
अन्य समाचार
जशपुर की वादियों में काजू की खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जा रही है
जिला प्रशासन, उद्यान विभाग, रीड्स और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से जिले में काजू उत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में जशपुर के करीब 7800 किसान लगभग 7800 एकड़ भूमि पर काजू की खेती कर रहे हैं।
Read More...
राष्ट्रपति मुर्मु ने बांटे पद्म पुरस्कार, 66 हस्तियों को मिला सम्मान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में वर्ष 2026 के पहले पद्म पुरस्कार प्रदान किए। केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को 131 पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की थी। पहले चरण में देश की 66 हस्तियों को सम्मानित किया गया, जबकि बाकी विजेताओं को दूसरे चरण में पुरस्कार दिए जाएंगे।
Read More...
समय बदला, परिस्थितियाँ बदलीं, लेकिन सेवा और समर्पण की भावना आज भी वैसी ही अडिग है...हजारों लोगों को निःशुल्क श्रीमद्भगवत गीता वितरित कर सकारात्मक बदलाव लाने वाले सुमित जी
कहते हैं कि “एक पेन और एक व्यक्ति पूरी दुनिया बदल सकता है”, और यह पंक्ति सुमित गुप्ता पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अब तक वे हजारों लोगों को निःशुल्क श्रीमद्भगवत गीता वितरित कर चुके हैं।
Read More...
जब बालकनी बन जाए बच्चों की पहली प्रकृति पाठशाला
जैविक बागवानी बच्चों को यह समझने का अवसर देती है कि भोजन आखिर उगता कैसे है। मिट्टी में खाद मिलाना, पौधों को पानी देना और धूप की जरूरत को समझना उन्हें प्रकृति के संतुलन से परिचित कराता है।
Read More...
सागर शिंदे जैसे अग्निशमनकर्मी हमें याद दिलाते हैं कि असली हीरो फिल्मों में नहीं, बल्कि उन वर्दियों में होते हैं जो हर आपदा में सबसे पहले पहुंचती हैं
घने धुएं और तेज लपटों के बीच अग्निशमन विभाग के स्टेशन अधिकारी सागर शिंदे अपनी टीम के साथ अंदर पहुंचे। हर सेकंड जानलेवा था, फिर भी उनके कदम पीछे नहीं हटे। बाजार के भीतर कपड़ों और सामान का भारी भंडार आग को और भयावह बना रहा था।
Read More...
जब गांव ने बदल दी अपनी तकदीर: महाराष्ट्र का निवाजे बना हरित क्रांति की मिसाल
पिछले एक दशक में लगभग 350 परिवारों वाले इस गांव ने अपनी जीवनशैली बदलकर कार्बन उत्सर्जन को काफी कम कर दिया है। ग्रामीण अब रासायनिक खादों का उपयोग नहीं करते, बल्कि बायोगैस से निकलने वाली स्लरी को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
Read More...
Untold stories of inspirational personalities : नेशनल स्पीच पैथोलॉजिस्ट डे : उन लोगों के नाम जो आवाज़ को पहचान देते हैं
हर वर्ष 18 मई को मनाया जाने वाला नेशनल स्पीच पैथोलॉजिस्ट डे उन विशेषज्ञों को सम्मान देने का अवसर है, जो लोगों की आवाज़, भाषा और आत्मविश्वास को नई पहचान देते हैं।
Read More...
भारत का ‘ट्विन्स विलेज’: एक ऐसा गांव, जहां हर चेहरा किसी दूसरे का प्रतिबिंब लगता है
करीब दो हजार परिवारों वाले इस गांव में सैकड़ों जुड़वां बच्चों के जोड़े मौजूद हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सिलसिला वर्षों से लगातार जारी है। हर साल यहां फिर नए जुड़वां बच्चों का जन्म होता है, मानो इस मिट्टी में कोई अनदेखा रहस्य छिपा हो। वैज्ञानिकों ने पानी, खानपान, पर्यावरण और आनुवंशिक कारणों तक का अध्ययन किया, लेकिन अब तक कोई भी सिद्धांत इस रहस्य का पूरी तरह उत्तर नहीं दे पाया।
Read More...
डफली, जुनून और 500 सीड बॉल…गुलमोहर-अमलतास के बीजों से लिखी जा रही हरियाली की नई कहानी
वीरेंद्र सिंह और उनके साथियों का मानना है कि सिर्फ सरकार के भरोसे पर्यावरण नहीं बचाया जा सकता। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इसी सोच के साथ उन्होंने लोगों से आम खाने के बाद उसके बीजों को फेंकने की बजाय जंगलों या खाली जमीनों में डालने की अपील की
Read More...
कौन हैं IPS बी. सुमति? महिला सुरक्षा का सच जानने के लिए आधी रात को अकेले किया अंडरकवर ऑपरेशन, हर तरफ हो रही चर्चा
Who is IPS B. Sumathi: हैदराबाद की मलकाजगिरी पुलिस कमिश्नर IPS बी. सुमति का अंडरकवर ऑपरेशन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. आधी रात सलवार-सूट पहनकर बस स्टॉप पर पहुंचीं महिला अधिकारी ने महिलाओं की सुरक्षा की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की
Read More...