कमलेश यादव : कई लोग जीवन में धन, पद और प्रसिद्धि के सपने देखते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने सपनों में दूसरों का भविष्य संवारने की चाह रखते हैं। कर्नाटक के 79 वर्षीय अंके गौड़ा ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य किताबों को लोगों तक पहुंचाना बनाया। जिस व्यक्ति ने बचपन में किताबों की कमी का दर्द झेला, उसी ने आगे चलकर लाखों किताबों का ऐसा संसार खड़ा कर दिया, जो आज हजारों विद्यार्थियों और शोधार्थियों के सपनों को पंख दे रहा है।

मांड्या जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अंके गौड़ा का बचपन अभावों के बीच बीता। उस समय गांवों में किताबें आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। पढ़ने की ललक तो थी, लेकिन संसाधन सीमित थे। कई बार उन्हें केवल एक पुस्तक पाने के लिए दूर-दूर तक सफर करना पड़ता था। यही संघर्ष उनके मन में एक संकल्प बनकर बस गया कि भविष्य में किसी बच्चे को केवल गरीबी या संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़े।

जीवन आसान नहीं था। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उन्होंने बस कंडक्टर से लेकर चीनी मिल कर्मचारी, दूध विक्रेता और बीमा एजेंट तक कई काम किए। आमदनी सीमित थी, लेकिन किताबों के प्रति उनका प्रेम असीम था। वे अपनी जरूरतों में कटौती कर लेते, लेकिन जहां भी कोई अच्छी पुस्तक दिखाई देती, उसे अपने संग्रह में शामिल करने का प्रयास जरूर करते। उनके लिए हर किताब केवल कागज का पुलिंदा नहीं, बल्कि किसी के उज्ज्वल भविष्य की संभावना थी।

धीरे-धीरे यह शौक एक मिशन में बदल गया। वर्षों तक उन्होंने दुर्लभ पुस्तकें, पत्रिकाएं, शोध सामग्री, शब्दकोश और विभिन्न भाषाओं के साहित्य को एकत्रित किया। उनके घर का हर कोना किताबों से भरने लगा। परिवार ने भी इस जुनून को समझा और उनका साथ दिया। समय के साथ यह संग्रह इतना विशाल हो गया कि उसने एक भव्य पुस्तकालय का रूप ले लिया।

आज "पुस्तक माने" नाम से प्रसिद्ध यह पुस्तकालय लगभग 20 लाख पुस्तकों का खजाना बन चुका है। यहां स्कूली बच्चों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा, शिक्षक, शोधार्थी और ज्ञान के प्यासे लोग निःशुल्क अध्ययन कर सकते हैं। अंके गौड़ा, उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी और पुत्र सागर स्वयं इस पुस्तकालय की देखभाल करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर आगंतुक को ज्ञान का यह खजाना खुले दिल से उपलब्ध हो।

उनकी इस अद्भुत सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री सम्मान से अलंकृत किया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है जो मानती है कि समाज की सबसे बड़ी पूंजी शिक्षा और ज्ञान है। अंके गौड़ा ने यह साबित कर दिया कि बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े संकल्प की आवश्यकता होती है।

अंके गौड़ा की कहानी हमें सिखाती है कि यदि किसी व्यक्ति के भीतर समाज के लिए कुछ करने की सच्ची भावना हो, तो साधारण परिस्थितियां भी असाधारण परिणाम पैदा कर सकती हैं। एक समय जो बालक किताबों की तलाश में मीलों चलकर जाता था, आज उसने ऐसा ज्ञान मंदिर खड़ा कर दिया है जहां लाखों संभावनाएं जन्म ले रही हैं। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि एक अच्छी किताब केवल जीवन नहीं बदलती, बल्कि उससे जुड़ा एक संकल्प पूरे समाज का भविष्य बदल सकता है।

स्रोत:

'कभी बस कंडक्टर रहे, अब पद्म पुरस्कार विजेता: अंके गौड़ा कौन हैं, वो व्यक्ति जिन्होंने 20 लाख किताबों के साथ भारत का सबसे बड़ा मुफ्त पुस्तकालय बनाया' - इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा 25 जनवरी 2026 को प्रकाशित।

Share

अन्य समाचार

img-20260714-wa0025

एक आंख की रोशनी गई, मगर हजारों जीवन में उम्मीद की रोशनी जगा दी...अपनी पीड़ा को समाज की सेवा में बदलने वाले, डॉक्टर सुदर्शन देवांगन

डॉ. एस.के. (सुदर्शन) देवांगन डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस विचार को अपने जीवन में साकार कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि "जब पढ़-लिखकर काबिल बन जाओ, तब उस समाज को मत भूलना, जहां से तुम आए हो।" पिछले 12 वर्षों से वे रातापयली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद मरीजों का निःशुल्क इलाज कर रहे हैं।


Read More...
img-20260719-wa0028

जब गांव बना परिवार : 13 वर्षों से स्वच्छता की मिसाल, महिलाओं ने खुद संभाली गांव की सफाई

ग्राम खैरा की यह प्रेरक कहानी पूरे देश को संदेश देती है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है


Read More...
img-20260701-wa0002

सहयोग की छोटी-सी पहल भी किसी जरूरतमंद के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है

स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद उनका सेवा भाव लगातार समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंच रहा है।


Read More...
img-20260621-100045

सेवा, सौंदर्य और महिला सशक्तिकरण की बनीं मिसाल...नेपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली पहली महिला रुना शर्मा

एक सशक्त महिला का पर्याय हैं रुना शर्मा जिन्हें नेपाल में आयोजित एक्सीलेंस अवार्ड प्राप्त कर अंतराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाली पहली महिला जिसे CGPSC में विशेस उल्लेख किया गया हैं।


Read More...
img-20260618-072027

प्लास्टिक या धातु नहीं, केवल बांस और ताड़ के पत्ते: मेघालय की 100 साल पुरानी छतरियों में हैंडल नहीं है, लेकिन ये आपको भारी बारिश से बचा सकती हैं

मेघालय के निवासी लंबे समय से हाथ से बने वर्षा रोधकों का सहारा लेते रहे हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'नप्स' कहा जाता है । ये रोधक उन्हें लगातार बारिश से बचाते हैं, खासकर मानसून के महीनों में।


Read More...
img-20260615-073613

पुरस्कार विजेता गांव जिसने किसानों के हाथों में एआई पहुंचाया और अपनी ग्राम सभा की बैठकों का सीधा प्रसारण किया

राजन्ना सिरसिल्ला जिले के मल्लरम गांव में, जिसकी आबादी 2,500 है, एक सरपंच और उनके बीटेक बेटे ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है जो किसानों को फसलों के बारे में वास्तविक समय में मार्गदर्शन देता है, सार्वजनिक खर्च के हर रुपये का सार्वजनिक रिकॉर्ड रखता है और ग्राम सभा की बैठकों का सीधा प्रसारण करता है।


Read More...
img-20260613-055100

ट्रक ड्राइवर का बेटा, जो हर दिन स्कूल जाने के लिए 6 किलोमीटर पैदल चलता था, बड़ा होकर रॉकेट बनाने वाला बना

एक किसान परिवार में जन्मे आनंद मेगालिंगम ने आर्थिक कठिनाइयों, कॉलेज छोड़ने के दौर और कई असफलताओं को पार करते हुए स्पेस ज़ोन इंडिया की स्थापना की, जो पुन: प्रयोज्य रॉकेट प्रौद्योगिकी पर काम करने वाला एक स्टार्टअप है और भारत के बढ़ते अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान दे रहा है।


Read More...
b85a7d87-63a6-4604-9ced-dcbdc110c9b4

National Teacher Award 2026: क्या है राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड, किसे मिलता है सम्मान; रजिस्ट्रेशन पात्रता सहित पूरी डिटेल करें चेक

राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। देश के शिक्षकों को यह अवार्ड दो कैटेगरी में दिया जाएगा। आवेदन करने की अंतिम ...और पढ़ें


Read More...
7dda543d-faa3-43fa-8b78-955328176904

झुग्गी की गलियों से जर्मनी तक: मां के विश्वास ने बदली संतोष यादव की तकदीर

संतोष यादव दुनिया के तकनीकी क्षेत्र में एक सम्मानित नाम हैं। मुंबई की झुग्गी बस्ती से निकलकर वह जर्मनी में प्रिंसिपल डेवलपर एडवोकेट के पद पर कार्यरत हैं, गूगल डेवलपर एक्सपर्ट हैं, भारत के पहले GitHub स्टार हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने विचार साझा करते हैं।


Read More...