- Post by Admin on Monday, Oct 19, 2026
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गोपी साहू ; कोलकाता की गलियों में अगर आपको बिजली के डब्बों पर सत्यजीत रे, अमिताभ बच्चन या सौरव गांगुली की रंगीन पेंटिंग दिखे तो चौंकिएगा मत। ये हैं 63 साल के कलाकार रंजीत दास उर्फ मुदर, जिन्होंने पिछले 10 साल में अपने खुद के पैसों से 400 से ज्यादा बिजली के बॉक्स को कला में बदल दिया है।
कभी पोस्टरों और गंदगी से ढके ये फीडर बॉक्स शहर की बदसूरती माने जाते थे। रंजीत दास ने सोचा - क्यों न इन्हें ही कैनवास बना दिया जाए। एक दिन ब्रश और पेंट लेकर निकल पड़े। हर बॉक्स को पहले साफ करते, पोस्टर हटाते, प्राइमर लगाते और फिर उस पर बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को उकेर देते। कोई सरकारी मदद नहीं, कोई फंड नहीं - सिर्फ अपना जुनून।
रंजीत दास ने बंगाल फाइन आर्ट्स कॉलेज से पढ़ाई की है और 30 साल से कमर्शियल आर्टिस्ट हैं। कुछ साल पहले हार्ट में ब्लॉकेज भी आया, किराए के कमरे में अकेले रहते हैं, पब्लिक बस में पेंट के डिब्बे लेकर घूमते हैं। कई बार लोग ताने मारते हैं, बनी हुई पेंटिंग को खरोंच देते हैं, फिर भी वो हार नहीं मानते। वो कहते हैं, "कलाकार का जीवन दर्द का है, पर दर्द में भी खुश रहना ही कला है।"
उनके बनाए बप्पी लाहिड़ी के पोर्ट्रेट को देखने खुद बप्पी दा का परिवार आया था - लेक काली बाड़ी के पास वाली पेंटिंग देखने। आज टूरिस्ट, लोकल लोग रुक कर उनकी पेंटिंग देखते हैं, फोटो खिंचवाते हैं। कोलकाता नगर निगम ने भी अब उनकी कला को सराहना शुरू की है।
मुदर की कहानी बताती है कि शहर को सुंदर बनाने के लिए बड़ी योजना नहीं, एक इंसान का छोटा सा कदम ही काफी है। एक ब्रश, थोड़ा रंग और शहर को अपना घर समझने का जज्बा - यही असली पॉजिटिव इंडिया है। सत्यदर्शन LIVE सलाम करता है कोलकाता के इस रंगों वाले हीरो को।
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