कमलेश यादव, राजनांदगांव। कहते हैं, सपने उन्हीं के पूरे होते हैं जिनमें हार मानने की आदत नहीं होती। दस साल पहले कमला कॉलेज के पास एक छोटी-सी जगह में एक महिला ने अपने हाथों से भविष्य गढ़ने का फ़ैसला किया। न बड़ी पूँजी थी, न कोई बना-बनाया नाम। साथ थीं एक ज़िद कि "मैं खुद भी आगे बढ़ूँगी और दूसरों को भी साथ लेकर चलूँगी।" आज उसी जगह पर हुनरमंद बेटियाँ आत्मविश्वास के साथ अपने हुनर को मुकाम दे रही हैं, और इस बदलाव की नायिका को पूरा शहर रश्मि हरिहारनो के नाम से जानता है।

जब "रश्मि ब्यूटी सैलून एंड स्पा" की नींव रखी गई, तब वहाँ न भीड़ थी, न चमक-दमक। थीं तो बस दो लड़कियाँ और रश्मि हरिहारनो का अटूट भरोसा कि मेहनत एक दिन रंग लाएगी।

उन दो लड़कियों में से एक की सुबह सब्ज़ी की टोकरी के साथ शुरू होती थी। दिन भर आवाज़ लगाकर सब्ज़ी बेचना और शाम को थोड़ी-सी कमाई लेकर घर लौटना, यही उसकी ज़िंदगी थी। उसने शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसकी तक़दीर कभी इस तरह करवट लेगी। पर रश्मि की नज़र ने उस साधारण-सी लड़की में छिपा हुनर पहचान लिया।

उन्होंने उसे सिर्फ़ काम नहीं सिखाया, बल्कि तराशा, सँवारा और यह भरोसा दिया कि "तुम भी कर सकती हो।" धीरे-धीरे वही लड़की ब्यूटी पार्लर का पूरा काम सीख गई। आज वह हर महीने अच्छी आमदनी कमाती है। अब वह किसी के सहारे की मोहताज नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी एक आत्मनिर्भर महिला है।

और यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। जहाँ कभी सिर्फ़ दो लड़कियाँ थीं, वहाँ आज प्रशिक्षित कर्मचारियों की पूरी टीम है। यह सैलून अब सिर्फ़ रश्मि का सपना नहीं रहा। यह कई घरों के चूल्हे की आँच, कई परिवारों की उम्मीद और कई बेटियों के आत्मसम्मान की पहचान बन चुका है।

काँटों भरा था रास्ता, पर कदम नहीं रुके: रश्मि के लिए यह सफ़र फूलों की सेज नहीं था। बदलता समाज, बदलती पसंद और कारोबार को टिकाए रखने की कड़ी चुनौती, हर मोड़ पर परीक्षा थी। कई बार लगा होगा कि अब बस, बहुत हुआ। मगर रश्मि ने हर मुश्किल को सीढ़ी बना लिया। उनका यकीन था कि रुकना हार है और चलते रहना जीत की पहली शर्त।

जीत का मंत्र: खुद को रोज़ बेहतर बनाओ ब्यूटी इंडस्ट्री में मुकाबला बहुत कड़ा है। यहाँ वही आगे बढ़ता है जो ठहरता नहीं। रश्मि के पास कामयाबी की एक ही कुंजी है: "टिके रहना है तो खुद को बदलते समय के साथ अपग्रेड करते रहना होगा।" यही सोच दस साल बाद भी उन्हें भीड़ से अलग और सबसे आगे खड़ा रखती है।

"महिला हिम्मत रखे, तो पूरा परिवार जीत जाता है" रश्मि का दृढ़ विश्वास है कि हर परिवार की धुरी महिला होती है। जब महिला खुद को मज़बूत रखती है और परिवार को थामे रहती है, तो बुरे से बुरा वक़्त भी हार जाता है। लेकिन अगर वही हिम्मत छोड़ दे, तो बाकी सबका हौसला भी डगमगा जाता है। यह उनके लिए सिर्फ़ विचार नहीं, जिया हुआ सच है।

उन्होंने अपने संघर्ष से यह साबित करके दिखाया है। असली सुंदरता वह, जो दूसरों की ज़िंदगी निखार दे: रश्मि का सैलून चेहरों पर निखार लाता है, पर उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि कुछ और है। उन्होंने कई लड़कियों के हाथों में हुनर, दिल में आत्मसम्मान और आँखों में अपने पैरों पर खड़े होने का सपना रख दिया।

आज संस्कारधानी राजनांदगांव में रश्मि हरिहारनो हर उस महिला के लिए रोशनी की किरण हैं जो खुद से कहती है, "मुझसे नहीं होगा।"

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