- Post by Admin on Friday, Oct 16, 2026
- 208 Viewed
![]()
कमलेश यादव, राजनांदगांव। कहते हैं, सपने उन्हीं के पूरे होते हैं जिनमें हार मानने की आदत नहीं होती। दस साल पहले कमला कॉलेज के पास एक छोटी-सी जगह में एक महिला ने अपने हाथों से भविष्य गढ़ने का फ़ैसला किया। न बड़ी पूँजी थी, न कोई बना-बनाया नाम। साथ थीं एक ज़िद कि "मैं खुद भी आगे बढ़ूँगी और दूसरों को भी साथ लेकर चलूँगी।" आज उसी जगह पर हुनरमंद बेटियाँ आत्मविश्वास के साथ अपने हुनर को मुकाम दे रही हैं, और इस बदलाव की नायिका को पूरा शहर रश्मि हरिहारनो के नाम से जानता है।
जब "रश्मि ब्यूटी सैलून एंड स्पा" की नींव रखी गई, तब वहाँ न भीड़ थी, न चमक-दमक। थीं तो बस दो लड़कियाँ और रश्मि हरिहारनो का अटूट भरोसा कि मेहनत एक दिन रंग लाएगी।
उन दो लड़कियों में से एक की सुबह सब्ज़ी की टोकरी के साथ शुरू होती थी। दिन भर आवाज़ लगाकर सब्ज़ी बेचना और शाम को थोड़ी-सी कमाई लेकर घर लौटना, यही उसकी ज़िंदगी थी। उसने शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसकी तक़दीर कभी इस तरह करवट लेगी। पर रश्मि की नज़र ने उस साधारण-सी लड़की में छिपा हुनर पहचान लिया।
उन्होंने उसे सिर्फ़ काम नहीं सिखाया, बल्कि तराशा, सँवारा और यह भरोसा दिया कि "तुम भी कर सकती हो।" धीरे-धीरे वही लड़की ब्यूटी पार्लर का पूरा काम सीख गई। आज वह हर महीने अच्छी आमदनी कमाती है। अब वह किसी के सहारे की मोहताज नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी एक आत्मनिर्भर महिला है।
और यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। जहाँ कभी सिर्फ़ दो लड़कियाँ थीं, वहाँ आज प्रशिक्षित कर्मचारियों की पूरी टीम है। यह सैलून अब सिर्फ़ रश्मि का सपना नहीं रहा। यह कई घरों के चूल्हे की आँच, कई परिवारों की उम्मीद और कई बेटियों के आत्मसम्मान की पहचान बन चुका है।
काँटों भरा था रास्ता, पर कदम नहीं रुके: रश्मि के लिए यह सफ़र फूलों की सेज नहीं था। बदलता समाज, बदलती पसंद और कारोबार को टिकाए रखने की कड़ी चुनौती, हर मोड़ पर परीक्षा थी। कई बार लगा होगा कि अब बस, बहुत हुआ। मगर रश्मि ने हर मुश्किल को सीढ़ी बना लिया। उनका यकीन था कि रुकना हार है और चलते रहना जीत की पहली शर्त।
जीत का मंत्र: खुद को रोज़ बेहतर बनाओ ब्यूटी इंडस्ट्री में मुकाबला बहुत कड़ा है। यहाँ वही आगे बढ़ता है जो ठहरता नहीं। रश्मि के पास कामयाबी की एक ही कुंजी है: "टिके रहना है तो खुद को बदलते समय के साथ अपग्रेड करते रहना होगा।" यही सोच दस साल बाद भी उन्हें भीड़ से अलग और सबसे आगे खड़ा रखती है।
"महिला हिम्मत रखे, तो पूरा परिवार जीत जाता है" रश्मि का दृढ़ विश्वास है कि हर परिवार की धुरी महिला होती है। जब महिला खुद को मज़बूत रखती है और परिवार को थामे रहती है, तो बुरे से बुरा वक़्त भी हार जाता है। लेकिन अगर वही हिम्मत छोड़ दे, तो बाकी सबका हौसला भी डगमगा जाता है। यह उनके लिए सिर्फ़ विचार नहीं, जिया हुआ सच है।
उन्होंने अपने संघर्ष से यह साबित करके दिखाया है। असली सुंदरता वह, जो दूसरों की ज़िंदगी निखार दे: रश्मि का सैलून चेहरों पर निखार लाता है, पर उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि कुछ और है। उन्होंने कई लड़कियों के हाथों में हुनर, दिल में आत्मसम्मान और आँखों में अपने पैरों पर खड़े होने का सपना रख दिया।
आज संस्कारधानी राजनांदगांव में रश्मि हरिहारनो हर उस महिला के लिए रोशनी की किरण हैं जो खुद से कहती है, "मुझसे नहीं होगा।"
अन्य समाचार
मैंने कभी नहीं सोचा कि मैं लड़की हूँ तो नहीं कर पाऊँगी...मेरे लिए गाड़ी ही मेरा मंदिर है और स्टीयरिंग ही मेरी पूजा...ट्रक, हाइवा और जेसीबी चलाने वाली काजल खारी
भारी वाहन चलाना कोई आसान काम नहीं है। ट्रक, हाइवा और जेसीबी जैसी विशाल गाड़ियों को संभालने के लिए ताकत के साथ धैर्य और सूझबूझ भी चाहिए। लंबे सफ़र हैं, धूल और धूप है, और ऊपर से समाज की वह पुरानी सोच भी कि "यह लड़कियों का काम नहीं
Read More...
सिर्फ आवाज़ नहीं, रोज़गार और सम्मान की लड़ाई: विद्या राजपूत की जिद - ऐसा समाज जहाँ ट्रांसजेंडर को पहचान न छिपानी पड़े
आज मितवा समिति रायपुर के सरोना में "गरिमा गृह" चलाती है। यहाँ समाज से बहिष्कृत 18 से 60 साल के ट्रांसजेंडरों को आश्रय मिलता है। सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटीशियन, सेल्फ डिफेंस, कुकिंग, स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है। विद्या के अनुसार यहाँ से ट्रेनिंग लेने वाले 50% लोगों को बड़ी कंपनियों और सरकारी नौकरियों में जॉब मिल जाती है।
Read More...
सुई-धागे से टूटे हौसलों को जोड़ती श्रीमती कुसुम जितेंद्र साहू
उनकी कहानी हर उस महिला के लिए संदेश है जो मुश्किलों से घिरी है कि हाथ में हुनर और दिल में हिम्मत हो, तो अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, सुबह ज़रूर होती है।
Read More...
पंचायतीनामा...अपना काम खुद कर लो...जहां लिखी जाती है आत्मनिर्भरता की नई इबारत...जनसहयोग से लाफिन कला ने खुद लिखी विकास की नई कहानी
50 लाख के काम, 40 हजार वर्गफीट का कांक्रीट गौठान, तालाब के बीच बन रहा 25 लाख का मंदिर, और कलेक्टर बोले- दूसरे गांव भी लें सीख
Read More...
दंतेवाड़ा के आदिवासी बच्चों ने रचा इतिहास, 11 छात्र बनेंगे डॉक्टर
'छू लो आसमान' से निकले छात्रों को MBBS और BDS में दाखिला, दो ने JEE पास कर NIT रायपुर में लिया प्रवेश
Read More...
रोशनी से चलेगा दिमाग का "स्विच"...ऑप्टोजेनेटिक्स की खोज के लिए तीन वैज्ञानिकों को 2026 का चिकित्सा नोबेल
कभी कल्पना थी, आज हकीकत है: प्रकाश की किरण से जीवित मस्तिष्क की कोशिकाओं को चालू-बंद करने की तकनीक ने बदल दी न्यूरोसाइंस की दुनिया
Read More...
ड्राइवर का अपनी बारी का इंतज़ार करना, किसान का मूल्य सूची छोड़ देना, गांव का अपनी सफ़ाई खुद करने पर सहमत होना...पूर्वोत्तर भारत की नागरिक चेतना
मिज़ोरम की पहाड़ी राजधानी आइजोल के बिना निशान वाले चौराहों पर गाड़ियां अपनी बारी का इंतज़ार करती हैं, और सुबह की सबसे तेज़ आवाज़ अक्सर ड्राइवरों की धन्यवाद वाली विनम्र बीप की होती है।
Read More...
आर्ना फाउंडेशन की कहानी....रायपुर की चमक के पीछे छूटे दर्द को एक महिला ने कैसे बनाया हजारों की उम्मीद
समाजसेविका रुना शर्मा को समझने के लिए किसी परिचय की जरूरत नहीं, बस इतना काफी है कि उन्होंने वो देखा जो अक्सर लोग देखकर भी अनदेखा कर देते हैं।
Read More...
मिठाई नहीं, स्टेशनरी दो...गणपति उत्सव के जरिए इस दंपत्ति ने बदली 400 आदिवासी बच्चों की जिंदगी
त्योहार सिर्फ खुशियां मनाने का मौका नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद करने का भी जरिया बन सकता है यही साबित कर रहे हैं मुंबई के पूजा और दीपेश देधिया।
Read More...
भारत की गड्ढों की समस्या का समाधान डेनमार्क से मिला: फाइबर-प्रबलित सड़कों का परीक्षण शुरू
भारत में सड़क के गड्ढे कोई मामूली परेशानी नहीं हैं सरकारी आंकड़ों के अनुसार इनसे जुड़ी दुर्घटनाएं हर साल हजारों में होती हैं, और सर्वोच्च न्यायालय तक टिप्पणी कर चुका है कि आतंकवादी हमलों से ज़्यादा भारतीय खराब सड़कों के कारण मरते हैं।
Read More...