- Post by Admin on Thursday, Oct 15, 2026
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कमलेश यादव; सुबह की हल्की धूप में सड़क पर एक ट्रक दौड़ा चला आ रहा है। राह चलते लोग गर्दन घुमाकर देखते हैं और ठिठक जाते हैं, क्योंकि स्टीयरिंग पर कोई पुरुष नहीं, एक युवती बैठी है। चेहरे पर भरोसा है और हाथ गाड़ी पर पूरी मज़बूती से जमे हैं। यही हैं छत्तीसगढ़ की काजल खारी, जिन्हें लोग प्यार से "दबंग लेडी ट्रक ड्राइवर" कहते हैं।
गौरतलब है कि, अमलेश्वर की रहने वाली काजल का गाड़ियों से रिश्ता बचपन में ही जुड़ गया था। जिस उम्र में ज़्यादातर बच्चे साइकिल चलाना सीखते हैं, उस उम्र में उन्होंने गाड़ी का स्टीयरिंग थाम लिया। बताया जाता है कि उन्होंने करीब 12 साल की उम्र में गाड़ी चलाना शुरू किया था। शौक धीरे-धीरे जुनून बना, और जुनून आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।
भारी वाहन चलाना कोई आसान काम नहीं है। ट्रक, हाइवा और जेसीबी जैसी विशाल गाड़ियों को संभालने के लिए ताकत के साथ धैर्य और सूझबूझ भी चाहिए। लंबे सफ़र हैं, धूल और धूप है, और ऊपर से समाज की वह पुरानी सोच भी कि "यह लड़कियों का काम नहीं।" काजल ने इन सबके बीच डरकर पीछे हटने के बजाय अपना रास्ता चुना। करीब 21 साल की उम्र से वे ट्रक चला रही हैं और छत्तीसगढ़ की पहली महिला ट्रक ड्राइवर के रूप में जानी जाती हैं।
काजल की सबसे ख़ास बात यह है कि उन्होंने अपनी पहचान के साथ कभी समझौता नहीं किया। कभी साड़ी में, कभी सूट में, यहां तक कि दुल्हन के जोड़े में भी ट्रक चलाते हुए उनके वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। इन वीडियो ने सबको एक ही संदेश दिया कि काम कपड़ों से नहीं, हुनर से होता है। जो हाथ सलीके से सिंदूर और चूड़ियां संभाल सकते हैं, वही हाथ टनों वज़नी ट्रक को भी संभाल सकते हैं।
आज काजल सिर्फ़ ट्रक चलाने तक सीमित नहीं हैं। वे जेसीबी, कार और बाइक भी चलाती हैं और अपने वीडियो के ज़रिए लाखों लोगों तक हौसले की बात पहुंचा रही हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें चाहने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें बड़ी संख्या उन बेटियों की है, जो गांव-कस्बों में रहकर कुछ अलग करने का सपना देखती हैं।
काजल को देखकर कई लड़कियों के मन में अब यह सवाल उठता है कि अगर काजल कर सकती हैं, तो हम क्यों नहीं? यही सवाल बदलाव की असली शुरुआत है। जब एक बेटी रास्ता बनाती है, तो उसके पीछे चलने वाली सैकड़ों बेटियों के लिए सफ़र आसान हो जाता है। काजल आज वही रास्ता बना रही हैं, जिस पर चलकर आने वाली पीढ़ी अपने सपनों तक पहुंच सकती है।
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