कमलेश यादव : सूरज तो हर दिन उगता है, लेकिन कुछ सुबहें इतिहास बन जाती हैं। आज का सूरज नारायणपुर के लिए वैसा ही था—एक नई किरण, एक नई उम्मीद, जैसे वर्षों से अंधेरे में डूबे किसी जीवन में पहली बार उजाला उतरा हो। यह सिर्फ सुबह नहीं थी, यह विश्वास की वापसी थी।

छत्तीसगढ़ का नारायणपुर, खासकर अबूझमाड़ का इलाका, लंबे समय तक माओवादी प्रभाव और डर की छाया में जीता रहा। यहां के लोगों के लिए सरकार एक दूर की चीज थी, एक ऐसा नाम जिसे उन्होंने सुना तो था, पर कभी महसूस नहीं किया। पगडंडियों और जंगलों के बीच जीवन चलता था, लेकिन विकास कहीं खो गया था।

इसी जमीन पर जब कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने कदम रखा, तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक दौरा नहीं था यह भरोसे का पहला स्पर्श था। दुर्गम रास्तों, कठिन पहाड़ियों और अनिश्चितताओं को पार करते हुए वे उन गांवों तक पहुंचीं, जहां आज तक कोई कलेक्टर नहीं पहुंच पाया था।

गांव वालों की आंखों में जो चमक थी, वह शब्दों से परे थी। पहली बार उन्होंने अपने सामने जिला कलेक्टर को देखा,कोई अधिकारी नहीं, बल्कि अपने बीच की एक संवेदनशील इंसान। बच्चों की मुस्कान, बुजुर्गों की नम आंखें और महिलाओं के चेहरे पर आई राहत, यह सब उस पल की सच्चाई बयान कर रहे थे।

जहां कभी राशन के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना मजबूरी थी, अब वहीं उम्मीद है कि सुविधाएं उनके दरवाजे तक आएंगी। जहां इलाज एक सपना था, वहां अब स्वास्थ्य सेवाओं की आस जगी है। जो इलाका कभी नेटवर्क से भी अछूता था, वहां अब विकास की बातें हो रही हैं। यह बदलाव छोटा नहीं, बल्कि क्रांतिकारी है।

सबसे भावुक दृश्य तब था, जब कलेक्टर मैडम गांव वालों के साथ जमीन पर बैठकर पेज-भात खा रही थीं। यह सिर्फ भोजन नहीं था, यह एक संदेश था...समानता का, अपनत्व का और उस दूरी को मिटाने का, जो सालों से बनी हुई थी। उस पल में शासन और जनता के बीच की दीवार जैसे खुद-ब-खुद गिर गई।

अबूझमाड़, जो कभी सिर्फ नक्सल प्रभाव के लिए जाना जाता था, आज नई पहचान बना रहा है—उम्मीद, विश्वास और सकारात्मक बदलाव की पहचान। यह कहानी नारायणपुर की नहीं, बल्कि उस साहस की है, जो कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता।

कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन का यह प्रयास सिर्फ एक शुरुआत है, लेकिन यह शुरुआत ही सबसे बड़ी जीत होती है। जब कोई अधिकारी अपने दायित्व से आगे बढ़कर दिल से काम करता है, तो बदलाव सिर्फ दिखता नहीं, बल्कि महसूस होता है। नारायणपुर की यह सुबह आने वाले कल की एक मजबूत नींव बन चुकी है।

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