रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से विशाखापट्ट्नम तक इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है. यह इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ खासकर बस्तर के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित होने जा रहा है. बस्तर जो कभी दुर्गम इलाकों में गिना जाता था इस कॉरिडोर के निर्माण से उसकी पहचान सुगम इलाकों में हो जाएगी. भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर न केवल दूरियों को कम करेगा, बल्कि बस्तर को ग्लोबल रूप से कनेक्ट करेगा. इससे बस्तर के उत्पादों को विश्व स्तर तक पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक सीधी पहुंच बन जाएगी.

दुर्गम घाटों से मिलेगी मुक्ति और समय की होगी बचत मौजूदा दौर में बस्तर से विशाखापट्टनम जाने के लिए ओडिशा और कोरापुट होकर जाना पड़ता है. यहां कठिन घाटों को पार करने में 7 से 9 घंटे तक का समय लगता है. भारी गाड़ियों को पहुंचने के लिए 7 से 9 घंटे तक का समय लगता है. ईंधन की खपत और मेंटेनेंस की वजह से यह मार्ग बेहद खर्चीला है. अब रायपुर विशाखापट्टनम कॉरिडोर के बन जाने से यह यात्रा साढ़े तीन से 4 घंटे में पूरा हो सकेगा.

सीधा रास्ता होने से वाहनों का ऑपरेटिंग कॉस्ट कम हो जाएगा. जिससे यातायात बेहद सुगम हो सकेगा. नबरंगपुर इंटरचेंज से बस्तर की रीच आसान रायपुर विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से गुजर रहा है. जगदलपुर मुख्यालय को इस कॉरिडोर से जोड़ने के लिए ओडिशा के नबरंगपुर का दासपुर इंटरचेंज महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा. जगदलपुर का ट्रैफिक मात्र 50-60 किमी का सफर तय कर नबरंगपुर इंटरचेंज के माध्यम से रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर में शामिल हो सकेगा, जिससे बस्तर सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ जाएगा.

बस्तरिया ब्रांड को मिलेगा इंटरनेशनल मार्केट इस कॉरिडोर के बनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बस्तर के प्रोडक्ट के लिए इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंच सुलभ हो जाएगी. बस्तर की अरेबिका कॉफी, जैविक इमली, महुआ उत्पाद और प्रसिद्ध ढोकरा शिल्प को विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुंचाना आसाना होगा. कम लॉजिस्टिक लागत से ये उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर मौजूद हो सकेंगे. इससे बस्तर वासियों को उनके प्रोडक्ट का उचित मूल्य मिलेगा. इससे बस्तर की अर्थव्यवस्था और छत्तीसगढ़ की आर्थिक उन्नति सुनश्चित हो सकेगी.

रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर बस्तर संभाग और पूरे छत्तीसगढ़ की आर्थिक स्थिति को बदल देगा. इस परियोजना के निर्माण में कुल 16,491 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. 464 किमी लंबा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर न केवल दूरी कम करेगा बल्कि बस्तर और छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास को गति देगा. छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति को बढ़ावा रायपुर विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर से बस्तर के आकांक्षी जिलों को सीधा फायदा होगा.

बस्तर को बेहतर सड़क संपर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का फायदा मिल सकेगा. बस्तर का कृषि उत्पाद और इस्पात सीधे रायपुर, दुर्ग-भिलाई और विशाखापट्टनम जैसे औद्योगिक केंद्रों से जुड़ जाएगा. इससे स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी, प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और सर्विस सेक्टर में नौकरियां विकसित होगी. यह इकोनॉमिक कॉरिडोर आर्थिक उन्नति की मार्ग साबित होगा.

औद्योगिक और खनिज विकास को मिलेगा बढ़ावा बस्तर क्षेत्र लौह अयस्क और अन्य खनिजों से समृद्ध है. यह कॉरिडोर इन खनिजों को विशाखापत्तनम पोर्ट तक तेजी से पहुंचाने में मदद करेगा, जिससे निर्यात और व्यापार में भारी उछाल आएगा. कॉरिडोर के किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर तैयार हो सकेंगे. जिससे बस्तर के मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का रास्ता खुल सकेगा. टूरिज्म सेक्टर को लगेंगे पंख रोड कनेक्टिविटी में सुधार होने से यहां इंटरनेशनल टूरिस्टों का आगमन बढ़ेगा.

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा, दंतेश्वरी मंदिर, ढोलकल गणेश, कुतुमसर गुफा और चित्रकोट-तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों तक विदेशी सैलानी आसानी से पहुंच सकेंगे. कांकेर जिले के बासनवाही के मंझिनगढ़ पहाड़ी को चीरकर 2.79 किमी लंबी छत्तीसगढ़ की पहली ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है. यह टनल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से गुजरती है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों का रहवास बाधित न हो.

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