कमलेश यादव : गांव की कच्ची गलियों में अक्सर कुछ आवाजें गूंजती थीं - अरे, ये तो गांव की साधारण महिला है… इससे क्या हो पाएगा? ये शब्द सिर्फ ताने नहीं थे…ये एक दिल को रोज़ तोड़ने वाले पत्थर थे। लेकिन शायद वो लोग नहीं जानते थे कि जिस महिला को वे कमज़ोर समझ रहे हैं,उसके अंदर एक आग जल रही थी अपने परिवार को खुशहाल बनाने की आग।

दुरपति साहू…एक साधारण गांव की महिला,जिसके पति रोज़ी-मजदूरी कर घर चलाते थे। हर दिन संघर्ष था…हर दिन एक नई चिंता…लेकिन दुरपति के दिल में एक सपना था"कुछ ऐसा करूं… कि घर की तकदीर बदल जाए।"

वो मानती थीं"अगर पति-पत्नी दोनों साथ कमाएं, तो गरीबी हार मान ही जाती है।" लेकिन रास्ता आसान नहीं था…समाज के ताने, गरीबी का दर्द,और सबसे बड़ी लड़ाई "लोग क्या कहेंगे?"पर एक दिन…उन्होंने तय कर लिया "अब डर नहीं… अब सिर्फ काम होगा!"

एक छोटे से कमरे से शुरुआत हुई…एक सिलाई मशीन…और ढेर सारा हौसला…और जन्म हुआ— “सिमरन लेडीज टेलर्स” शुरुआत में ग्राहक कम थे…कभी-कभी तो पूरा दिन बिना काम के गुजर जाता था।

लेकिन दुरपति हार मानने वालों में से नहीं थीं।उन्होंने हर कपड़े में अपना दिल लगाया,हर सिलाई में अपनी ईमानदारी बुनी,और हर ग्राहक को सम्मान दिया।

धीरे-धीरे…उनके काम की खुशबू फैलने लगी…लोग कहने लगे"काम तो बहुत बढ़िया करती हैं!"और वही लोग…जो कभी ताने देते थे,आज तारीफ करने लगे।

आज…दुरपति साहू सिर्फ खुद के लिए नहीं,बल्कि कई और ज़िंदगियों के लिए उम्मीद बन चुकी हैं।वो न सिर्फ अच्छा मुनाफा कमा रही हैं,बल्कि गांव की युवतियों और दिव्यांगों को सिलाई सिखाकर आत्मनिर्भर बना रही हैं। कई घरों में आज चूल्हा जल रहा है…तो उसकी एक वजह दुरपति भी हैं।

फिर भी…कभी-कभी दिल दुखता है…जब समाज कामकाजी महिलाओं को गलत नजर से देखता है। तब दुरपति बस यही सोचती हैं—"ईश्वर सबको सही सोच दे…"

इस पूरी जीवन यात्रा में उनके पति का साथ सबसे बड़ा सहारा बना। हर मुश्किल में उनका साथ…हर फैसले में उनका भरोसा…दुरपति की आंखों में आज भी कृतज्ञता झलकती है, "मुझे इतना अच्छा जीवनसाथी मिला… मैं सच में खुशकिस्मत हूं।"

आज…राजनांदगांव जिले के छोटे से गांव जोरातराई की वो साधारण महिला…एक मिसाल बन चुकी है। तिलई में स्थित उनका छोटा सा शॉप अब सिर्फ दुकान नहीं…एक सपनों की पाठशाला बन चुका है।

ये कहानी हमें सिखाती है…कि…ताने आपको तोड़ नहीं सकते,अगर आप खुद को मजबूत बना लें। गरीबी आपको रोक नहीं सकती,अगर आपके सपने बड़े हों। और समाज क्या कहेगा…ये मायने नहीं रखता,अगर आप जानते हैं कि आपको क्या करना है।

दुरपति साहू…आप सिर्फ एक महिला नहीं,बल्कि हिम्मत, आत्मविश्वास और उम्मीद की जीवित मिसाल हैं।

Share

अन्य समाचार

sqywyjxqqh5erjaiovoz

बिना हाथ-पैर के बनीं दुनिया की नंबर वन पैरा तीरंदाज,मिसाल है पायल नाग की कहानी

दुनिया के कई बड़े तीर अंदाजों को हराने वाली भारत की पैरा आर्चर तीरंदाज पायल नाग ने बचपन में 8 साल की उम्र में ही अपने दोनों हाथ और पर एक हादसे में गवा दिए थे. लेकिन इसके बाद उनके गुरु कुलदीप कुमार ने उनके लिए एक ऐसा डिवाइस बनाया, जिससे वह धनुष पकड़ सके और निशान लगा सके और जिसके बाद वह बनी नंबर-1 तीरंदाज.


Read More...
img-20260407-wa0010

इंसानियत जिंदा है बस उसे जीने वाले दिलों की जरूरत है...दिव्यांगता नहीं,सेवा है पहचान...रजनी वरवानी की प्रेरणादायक यात्रा

रजनी का मानना ​​है कि "इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।" इसी सोच के साथ, वह सालों से बिना थके ज़रूरतमंदों की मदद कर रही हैं।


Read More...
img-20260404-073628

सपनों की कोई उम्र नहीं: 72 की उम्र में स्टीयरिंग संभालती विद्या कौर...रोज़ाना अभ्यास करते हुए उन्होंने क्लच, गियर, ब्रेक और स्टीयरिंग पर नियंत्रण पाया

विद्या कौर की कहानी हमें यह सिखाती है कि सपनों की कोई समय सीमा नहीं होती। समाज चाहे कितनी भी सीमाएँ तय कर दे, अगर इरादे मजबूत हों तो हर बाधा पार की जा सकती है। उनका जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि हिम्मत, धैर्य और विश्वास के साथ हम किसी भी उम्र में अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।


Read More...
img-20260403-100322

आधुनिक भारतीय कला की अब तक की सबसे अधिक मूल्य वाली कृति...रिकॉर्ड 167.20 करोड़ रुपये में बिकी राजा रवि वर्मा की पेंटिंग 'यशोदा और कृष्ण'

प्रख्यात भारतीय चित्रकार राजा रवि वर्मा की ऑयल पेंटिंग ''यशोदा और कृष्ण'' बुधवार को मुंबई में सैफ्रोनआर्ट की स्पि्रंग लाइव नीलामी में रिकॉर्ड 167.20 करोड़...सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के प्रबंध निदेशक डॉ. साइरस एस पूनावाला ने खरीदा


Read More...
img-20260317-091627

मैं मानती हूं कि संसाधनों की कमी ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही है...अगर जिंदगी में संघर्ष न होता, तो शायद मैं आज यहां तक नहीं पहुंच पाती...ड्रोन दीदी शांति विश्वकर्मा

बचपन से ही मैंने कठिनाइयों को करीब से देखा, लेकिन शायद वही कठिनाइयाँ मेरी सबसे बड़ी ताकत बन गईं। आज लोग मुझे “ड्रोन दीदी” के नाम से जानते हैं, लेकिन इस पहचान तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।


Read More...
how-small-town-women-entrepreneurs-are-building-successful-businesses-063223962-16x9-0

स्टार्टअप हब की चकाचौंध से दूर, भारत भर में बड़े व्यवसाय बनाने वाली छोटे शहरों की महिलाओं से मिलें

भारत भर में, साधारण पृष्ठभूमि की महिलाएं ऐसे व्यवसाय स्थापित कर रही हैं जो रोजगार और अवसर पैदा कर रहे हैं। विनिर्माण उद्योगों से लेकर ऑनलाइन खुदरा उद्यमों और चिकित्सा स्टार्टअप तक, ये उद्यमी यह साबित कर रही हैं कि दृढ़ संकल्प, डिजिटल उपकरण और मार्गदर्शन छोटे विचारों को फलते-फूलते उद्यमों में बदल सकते हैं और महिला संस्थापकों की अगली पीढ़ी को प्रेरित कर सकते हैं।


Read More...
img-20260311-075603

कभी-कभी एक व्यक्ति ही काफी होता है': आनंद महिंद्रा ने धीरज जैन को सलाम किया, जिन्होंने दुबई में फंसे भारतीयों को आश्रय देने के लिए अपने फार्महाउस को परिवर्तित किया

खाड़ी देशों में उड़ानें बाधित हुईं। भारतीय व्यवसायी धीरज जैन ने अजमान स्थित अपने फार्महाउस को सैकड़ों फंसे हुए भारतीय यात्रियों के लिए खोल दिया। उनका घर एक शरणस्थल बन गया, जहाँ लोगों ने बिस्तर, भोजन और सामुदायिक सहयोग प्रदान किया।


Read More...
img-20260310-080717

फूल झड़ जाते हैं...पंखुड़ियाँ बह जाती हैं...और फिर, अगले वर्ष, पेड़ फिर से खिल उठते हैं, दशकों पहले बोई गई परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए...आईएफएस अधिकारी जिन्होंने 15 लाख पेड़ लगाए और शहर को गुलाबी ग्रीष्म ऋतु दी

जब 1980 के दशक में बेंगलुरु का तेजी से विस्तार होने लगा, तो पेड़ गायब होने लगे। आईएफएस अधिकारी सेतुराम गोपालराव नेगिनहाल ने एक ऐसी योजना के साथ कदम बढ़ाया जो आज भी शहर को आकार देती है।


Read More...
img-20260309-080040

एक अतिरिक्त रोटी की ताकत: जब आम लोग भूख के खिलाफ बनते हैं उम्मीद की किरण

कई परिवार अपनी थाली से थोड़ा हिस्सा अलग रखकर उन लोगों तक पहुंचाते हैं जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं होता। यह छोटी-सी पहल भूख मिटाने के साथ-साथ मानवता और सम्मान का संदेश भी देती है।


Read More...
img-20260308-092834

संघर्षों से निखरी सफलता: दीप्ति साहू की प्रेरक कहानी...क्वालिटी वर्क और ईमानदारी को बनाया अपना मंत्र, सौंदर्य ब्यूटी पार्लर से बनाई खास पहचान

भविष्य को लेकर दीप्ति साहू की सोच और भी व्यापक है। वह चाहती हैं कि आगे चलकर अधिक से अधिक युवतियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दें।


Read More...