कारवी यादव : सारंगढ़ बिलाईगढ़ की सुबह इस बार कुछ अलग थी। कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जब कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने “मिशन ट्रांसमिशन फ्री” प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया, तो यह केवल एक योजना की शुरुआत नहीं थी यह उन अनदेखे, अनकहे दर्द को खत्म करने की दिशा में एक सशक्त कदम था, जिसे लोग आज भी छुपाकर जीते हैं। The Leprosy Mission Trust India के सहयोग से यह राष्ट्रीय पहल अब सारंगढ़ बिलाईगढ़ और गढ़चिरोली जैसे जिलों में नई उम्मीद जगा रही है।

गौरतलब है कि, इस मिशन की सबसे खास बात है घर-घर पहुंचना। अब इलाज अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर दरवाजे तक दस्तक देगा। सर्वे टीम, मितानिन और स्व-सहायता समूह की महिलाएं मिलकर गांव-गांव जाएंगी, लोगों को कुष्ठ रोग के लक्षण और बचाव के बारे में जागरूक करेंगी। यह सिर्फ जानकारी देने का काम नहीं होगा, बल्कि समाज में फैले डर और भ्रांतियों को भी खत्म करने की कोशिश होगी।

डॉ. कन्नौजे ने इस पहल को संवेदनशीलता के साथ जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि मरीजों की पहचान और उनका इलाज पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। अक्सर लोग समाज के डर से बीमारी छुपाते हैं, लेकिन इस मिशन में विश्वास सबसे बड़ा आधार बनेगा। मरीजों को यह भरोसा दिलाया जाएगा कि उनकी जानकारी सुरक्षित है और उन्हें पूरी देखभाल मिलेगी वह भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में।

इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू है भौगोलिक फोकस। महानदी के किनारे बसे गांव, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है, वहां विशेष सर्वे किया जाएगा। क्योंकि अक्सर बीमारी वहीं पनपती है, जहां जागरूकता और सुविधाओं की कमी होती है। यह मिशन उन इलाकों तक रोशनी पहुंचाने का प्रयास है, जो अब तक अंधेरे में थे।

यह कहानी सिर्फ एक सरकारी योजना की नहीं, बल्कि एक बदलाव की शुरुआत है जहां डर की जगह विश्वास ले रहा है, और छुपाने की जगह इलाज सामने आ रहा है। “कुष्ठ मुक्त जिला” अब सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की उम्मीद बन गया है, जो स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जीना चाहता है।

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