कमलेश यादव : किसी के लिए दोनों हाथ उठाकर दुआ माँगना इबादत है, तो किसी के लिए वही हाथ आगे बढ़ाकर किसी का सहारा बन जाना इबादत बन जाता है। समाजसेविका रजनी वरवानी जी ने इसी दूसरे रास्ते को चुना है जहाँ हर मदद, हर सेवा, हर करुणा का भाव ही उनके लिए ईश्वर की सच्ची आराधना है। आज जब धरती तप रही है और हर जीव पानी के लिए व्याकुल है, तब रजनी जी का कहती है कि, “यह धरती हम सबकी है… जियो और जीने दो नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जियो और सम्मान के साथ जीने दो।” आइए, हम भी एक छोटा सा कदम उठाएं… अपने घर के बाहर एक परिंडा लगाएं, एक बर्तन पानी का रखें… क्योंकि कभी-कभी किसी की प्यास बुझाना ही सबसे बड़ी इंसानियत होती है।

गौरतलब है कि, वर्ष 2015 से शुरू हुआ यह सेवा का सफर आज भी उसी जुनून के साथ जारी है। भीषण गर्मी में जब इंसान ही पानी के लिए तरस जाता है, तब रजनी जी ने उन मूक जीवों की प्यास को महसूस किया, जो बोल नहीं सकते। उन्होंने गायों, कुत्तों और पक्षियों के लिए पानी के बर्तन रखवाए, दाना-पानी की व्यवस्था की और जगह-जगह परिंडे लगवाकर जीवन की डोर को थामे रखने का प्रयास किया।

उनकी सेवा सिर्फ पशु-पक्षियों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने गरीब और बेसहारा लोगों के लिए मटके, फल, जूस, दूध और भोजन सामग्री वितरित की। हर उस हाथ को थामने की कोशिश की, जो बेबस था। हर उस आंख में उम्मीद जगाई, जो निराशा से भरी थी। उनकी सेवा में न कोई दिखावा है, न कोई स्वार्थ बस एक सच्ची भावना है, “किसी की प्यास बुझ जाए, यही सबसे बड़ी पूजा है।”

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