- Post by Admin on Friday, Dec 26, 2025
- 344 Viewed
![]()
सत्यदर्शन लाइव डेस्क : एयर इंडिया ने 35 हजार फीट की ऊंचाई पर हेलमेट मैन ऑफ़ इंडिया’ को किया सम्मानित. जो सड़कों पर जान बचाता रहा, उसे आसमान ने भी सलाम किया. लोग कहते हैं युद्ध कोई भी हो जमीन और आसमान एक कर दो, ऐसा ही उदाहरण पेश किया है हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार ने, एक सड़क हादसे में अपने खास मित्र को खोने के बाद विक्टिम बनकर विलुप्त रहकर जीना स्वीकार नहीं किया. बल्कि पिछले 12 वर्षों से हर दिन सड़कों पर दुर्घटनाओं के खिलाफ जागरूकता की लड़ाई लड़ रहे हैं.
अब तक लोगों को 75 हजार हेलमेट निशुल्क दे चुके है और कहते हैं सड़क दुर्घटना एक अदृश्य युद्ध है और आप मेरे मित्र हैं. 20 दिसम्बर को हैदराबाद से दिल्ली के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे उनकी सीट इकोनॉमी क्लास में थी, लोग हमेशा की तरह उन्हें हेलमेट पहने देखकर आश्चर्य कर रहे थे फ्लाइट में, तभी फ्लाइट के कर्मचारियों ने उन्हें बिज़नेस क्लास में आमंत्रित किया.
यह केवल सीट बदलना नहीं था, बल्कि सड़क सुरक्षा के कार्यों और योगदान के प्रति दिया गया सम्मान था जो किसी सपने से कम नहीं था। फ्लाइट के सभी कर्मचारियों ने उनके कार्यों को एक सेलिब्रेशन की तरह मनाया.
ज़मीन पर रहकर लोगों की जान बचाने वाले एक योद्धा को पहली बार सम्मान आसमान में हो रहा था. उन्होंने कहा उस पल मेरी आँखें नम थीं दिल गर्व से भरा हुआ था और दिमाग़ बार-बार कह रहा था क्या ये सच है. आसमान में एक ही चेहरा याद आ रहा था रतन टाटा सिर्फ एक नाम नहीं थे, वे भारत की जनता के लिए एक अनमोल रत्न थे वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका दिल आज भी टाटा के हर कर्मचारी के भीतर धड़कता है.
यह मैने महसूस किया, जब मुझे 35,000 फीट की ऊँचाई पर एक लवली नोट हाथों में प्राप्त हुआ. यह सम्मान, अपनापन और इंसानियत से भरा हुआ था. मैं यह अनुभव आप सबके साथ इसलिए साझा कर रहा हूँ, क्योंकि कुछ पल हमें यह याद दिलाने के लिए होते हैं कि अच्छे कर्म कभी ज़मीन तक सीमित नहीं रहते, वे आसमान तक भी पहुँचते हैं.
अन्य समाचार
परिवर्तन के साथ चलना ज़रूरी है, लेकिन अपनी पहचान खोकर नहीं...गहनों में सजी संस्कृति, परंपरा को संवारती शुभा कलाकृति
छत्तीसगढ़ की महिलाएँ मेहनतकश हैं, उनके हाथों में पसीने की चमक है और आभूषणों में आत्मसम्मान की झलक। पारंपरिक गहने केवल सजावट नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीक रहे हैं। मगर यह भी सत्य है कि जिस चीज़ का उपयोग कम होने लगता है, वह धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ती है। आधुनिकता की तेज़ रफ्तार और बदलते फैशन ने इन पारंपरिक गहनों को भी हाशिए पर ला खड़ा किया।
Read More...
15 हजार घोंसलों से लौटी चहचहाहट: सामूहिक प्रयासों ने लौटाई गौरैयों की दुनिया
चेन्नई में एक व्यक्ति की पहल अब शहरी संरक्षण की मिसाल बन चुकी है। महज़ एक साल पहले लगाए गए 15,000 घोंसले के बक्सों के बाद, शहर में गौरैया फिर से दिखाई देने लगी हैं।
Read More...
आत्मनिर्भरता की राह : नाबार्ड के ग्रामीण भारत महोत्सव में रुचि महिला मंडल की सशक्त मौजूदगी
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा आयोजित यह 10 दिवसीय ग्रामीण भारत महोत्सव 19 दिसंबर से 28 दिसंबर 2025 तक गांधी मैदान, पटना में आयोजित किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए स्व-सहायता समूहों, महिला मंडलों और ग्रामीण उद्यमियों ने अपने उत्पादों के माध्यम से ग्रामीण भारत की रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता का सशक्त परिचय दिया।
Read More...
NHAI: एनएच-45 पर भारत की पहली वाइल्डलाइफ-सेफ सड़क, विकास और संरक्षण का नया मॉडल
सड़क विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के मकसद से अपनी तरह की पहली पहल में, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मध्य प्रदेश में नेशनल हाईवे 45 के एक अहम हिस्से पर इनोवेटिव 'टेबल-टॉप रेड रोड मार्किंग' शुरू की है।
Read More...
तैराकी की एक असाधारण चुनौती: सीमाओं को तय करने में तत्पर रहने वाली इस दुनिया में, 10 वर्षीय बच्ची ने यह साबित कर दिया कि शरीर की उम्र से कहीं अधिक हृदय की शक्ति मायने रखती है
अपने 10वें जन्मदिन पर, आनवी सुवर्णा ने उत्सव की जगह चुनौती को चुना और भोर में अटल सेतु से गेटवे ऑफ इंडिया तक 17 किलोमीटर तैरकर यह साबित कर दिया कि बहादुरी उम्र की प्रतीक्षा नहीं करती।
Read More...
परिवर्तन लाने वाले : तालाबों की गंदगी हटाकर स्वच्छ पानी लौटाना हो या घने जंगलों को बचाने की जिद...बदलाव वही करता है जो बदलने की ठान लेता है और वीरेंद्र ने यह ठान लिया
Social changemakers परिवर्तन का बीजारोपण तभी सच्चा फल देता है जब वह दिल से निकले, छत्तीसगढ़ के रहने वाले वीरेंद्र सिंह का हर कदम लोगों को प्रेरित करता है।
Read More...
सर्द हवाएं हों या तेज बारिश, चुनावी हलचल हो या कोई निजी कठिनाई, लेकिन एक शिक्षिका ऐसी भी हैं, जिन्होंने अपने 28 वर्षों के करियर में एक भी दिन छुट्टी नहीं ली
Suparna Ghosh: यह सूपर टीचर पश्चिम बंगाल के हुगली जिले की रहने वाली हैं। यहां राज्यधरपुर नेताजी हाई स्कूल में कार्यरत सुपर्णा घोष की कहानी हर किसी के लिए मिसाल है।
Read More...
बदलाव संभव है, यदि इच्छाशक्ति हो...हरियाली और आशा से पुनर्जीवित शहर, सामूहिक प्रयास की नई सुबह
बेंगलुरु का K100 कोई साधारण नाला नहीं था। यह शहर के 500 साल पुराने राजकालुवे सिस्टम का हिस्सा है, जिसे केम्पेगौड़ा ने शहर के तालाबों और जलस्रोतों को जोड़ने के लिए बनाया था। लेकिन तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण ने इसकी तस्वीर बदल दी
Read More...
"बिर होरो नी".....400 एकड़ जंगल को बचाने की अद्भुत स्वशासन परंपरा
जल, जंगल और जमीन की धरती झारखंड. इस राज्य का नाम भी जंगलों के कारण ही झारखंड पड़ा है. आदिवासियों की बहुतायत संख्या वाला यह राज्य जंगलों की भूमि वाला राज्य इसलिए बन पाया क्योंकि, इसके जंगलों को बचाने का जिम्मा सिर्फ वन विभाग ने नहीं उठा रखा है. बल्कि यहां के लोग भी इसे लेकर बहुत जागरूक हैं.
Read More...
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस....सीमाओं से परे सोचने वाले आर्टिस्ट बसंत साहू....पर्वतों से अड़िग चित्रसेन...शिक्षा के माध्यम से उजियारा की ओर ले जाने वाले होरी लाल यादव
दिव्यांगता कमजोरी नहीं, बल्कि इंसान के अदम्य साहस और क्षमताओं की पहचान है. चुनौती तब नहीं होती जब शरीर सीमित हो, बल्कि तब होती है जब समाज संकीर्ण दृष्टि से किसी की क्षमता को आंकता है.
Read More...