- Post by Admin on Saturday, Feb 07, 2026
- 110 Viewed
![]()
कोंडागांव; बस्तर में औषधीय खेती को लेकर आयोजित प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला केवल एक कृषि कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह आदिवासी समाज, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय नेतृत्व के ऐतिहासिक संगम के रूप में उभरा। क्षेत्रीय सह सुविधा केन्द्र (मध्य क्षेत्र), जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर तथा राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में यह आयोजन माँ दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर, चिखलपुटी (कोंडागांव) में संपन्न हुआ।
कोंडागांव, माकड़ी और मर्दापाल विकासखंड के लगभग 16 गांवों - लेमड़ी, सितली, केरावाही, बांग्ला, भोगाड़ी, गोलावंड, उमरगांव, भीरावंड, खड़का, कांटागांव, बड़े बेंदरी, पोलेंग, पल्ली आदि - से बड़ी संख्या में आदिवासी किसान बहन-भाई शामिल हुए। बईठका हाल खचाखच भरा रहा, जो बस्तर में जैविक और औषधीय खेती के प्रति बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।
किसानों ने काली मिर्च, ऑस्ट्रेलियन टीक, हल्दी, एनाटो, सफेद मूसली और स्टीविया जैसी फसलों का अवलोकन किया तथा अश्वगंधा और कपिकच्छु के बीज निःशुल्क प्राप्त किए। बड़ी संख्या में किसानों ने जैविक पद्धति से जड़ी-बूटी खेती अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय सह सुविधा केन्द्र जबलपुर के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानेंद्र तिवारी उपस्थित रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी भूपेश तिवारी ने की। कार्यक्रम का दूसरा सत्र और भी ऐतिहासिक बन गया जब छत्तीसगढ़ आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष राजाराम तोड़ेम मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे तथा अध्यक्षता आदिवासी समाज, बस्तर संभाग के अध्यक्ष दशरथ कश्यप ने की।
दोनों आदिवासी नेताओं ने मंच से स्पष्ट कहा, “आदिवासी जंगल के बिना नहीं जी सकता। यह दुर्भाग्य है कि विभिन्न कारणों से जंगल कम होते जा रहे हैं। अब हमें पेड़ों और जंगलों को कटने से बचाना होगा और माँ दंतेश्वरी हर्बल समूह से जुड़कर पेड़ लगाना तथा जड़ी-बूटियों की खेती सीखनी होगी।” दशरथ कश्यप ने कहा कि वे कई दशकों से डॉ. राजाराम त्रिपाठी के कार्यों से परिचित और प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर का नाम देश-विदेश में ऊंचा करने का कार्य हुआ है, जिस पर पूरा आदिवासी समाज गौरवान्वित है। दोनों नेताओं ने एक स्वर में कहा कि बस्तर के विकास के लिए आदिवासी परिवारों को साथ लेकर आगे बढ़ें, समाज आपके साथ खड़ा है।
कार्यक्रम की एक और विशेष उपलब्धि रही माकड़ी विकासखंड के कांटागांव की प्रगतिशील आदिवासी महिला किसान राजकुमारी मरकाम का सम्मान। निःशुल्क प्रदत्त पौधों से 54 किलो काली मिर्च उत्पादन कर उन्होंने यह सिद्ध किया कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन और बाजार सहयोग मिलने पर आदिवासी किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि औषधीय पौधों का बाजार लगातार बढ़ रहा है और आयुष क्षेत्र का कारोबार तेजी से विस्तार पा रहा है। ऐसे में बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र इस परिवर्तन के केंद्र बन सकते हैं।
बस्तर की मिट्टी, आदिवासी परिश्रम, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और अब आदिवासी समाज के शीर्ष नेतृत्व का खुला समर्थन, यह संकेत दे रहा है कि यहाँ शुरू हुई हर्बल पहल आने वाले समय में व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकती है।
अन्य समाचार
स्वदेशी मेले में आत्मनिर्भरता की चमक, रुचि महिला मंडल के हस्तनिर्मित बैग बने आकर्षण का केंद्र
मेले में आए खरीदारों का कहना है कि इन हस्तनिर्मित बैगों की गुणवत्ता बड़े ब्रांड्स को भी टक्कर देती है, जबकि कीमतें सभी लोगों की पहुंच में हैं। स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की भावना के साथ लोग इन बैगों की खरीदारी कर रहे हैं
Read More...
आधुनिकता के नए सफर में किसानों के साथ...ई-रिक्शा किसानों के लिए नई ऊर्जा, नई संभावनाओं और आर्थिक उन्नति का मजबूत आधार बन चुका है और इस बदलाव की धड़कन हैं आमीन मोटर्स
सुबह की पहली किरण के साथ खेतों से निकला किसान जब ई-रिक्शे में अपना ताज़ा उत्पाद लेकर मंडी पहुँचता है, तो उसके चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलकता है, क्योंकि अब उसके पास अपनी उपज को सही समय पर, सही दाम पर बेचने की ताकत है।
Read More...
Disability के तानों से लड़कर बनी सफल बिज़नेस वुमन
लोगों ने कहा, ये कुछ नहीं कर पाएगी पढ़ा-लिखाकर कोई फायदा नहीं। आज वही नूर सिर्फ 23 साल की उम्र में कॉरपोरेट जॉब के साथ ही अपना बिजनेस भी संभाल रही हैं।
Read More...
power of social media : सोशल मीडिया की ताकत से युवा उद्यमी जितेंद्र वर्मा ने बदल दी तस्वीर…आज देश-विदेश से लोग उनके फार्म पर इन दुर्लभ और अनोखी नस्ल की बकरियों को देखने आते हैं
जितेंद्र ने पूजा बोअर बकरी फार्म की स्थापना करके व्यवसाय की दुनिया में कदम रखा। यह फार्म दक्षिण अफ्रीकी बोअर बकरियों की विशेष नस्ल के लिए जाना जाता है।
Read More...
आत्मनिर्भर भारत की नायिकाएँ बनेंगी ‘बीमा सखी’, आप भी कर सकती हैं आवेदन
बीमा सखी योजना ग्रामीण भारत में महिलाओं को सशक्त बनाते हुए उन्हें वित्तीय सेवाओं की अग्रदूत बना रही है। एलआईसी और ग्रामीण विकास मंत्रालय की साझेदारी से शुरू की गई यह योजना महिलाओं को बीमा एजेंट के रूप में प्रशिक्षित कर न सिर्फ उन्हें रोज़गार दे रही है, बल्कि गाँव-गाँव में सामाजिक सुरक्षा और बीमा योजनाओं की पहुँच भी बढ़ा रही है।
Read More...
11 हज़ार से शुरू किया स्टार्टअप...शिल्पी सिन्हा की ‘मिल्क इंडिया’ की शुद्धता की कहानी
साल 2018 में शिल्पी ने बैंग्लुरू के सरजापुर से मिल्क इंडिया कंपनी की शुरुआत सिर्फ 11 हज़ार रुपयों में की थी. मिल्क इंडिया कंपनी बाकी के डेयरी स्टॉर्ट-अप से काफी अलग है.
Read More...
Startup: अपने लिए खुद बनाएं अवसर...स्टार्टअप में अनिश्चितताएं, लेकिन इनमें सीखने और खुद का विकास करने के भी भरपूर अवसर
यदि आप स्नातक हैं और यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि स्टार्टअप की दुनिया आपके लिए सही है या नहीं, तो कुछ बातों पर विचार करना चाहिए। स्टार्टअप में भरपूर ऊर्जा होती है। हालांकि, इसके साथ कुछ अनिश्चितताएं और चुनौतियां भी हैं
Read More...
बाज़ार का बुरा हाल
शुक्रवार की भारी गिरावट के साथ बीएसई सेंसेक्स पिछले साल 27 सितंबर के अपने 85,978.25 के रिकॉर्ड शिखर से अब तक 12,780.15 अंक यानी 14.86 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
अजीत कुमार शर्मा
Read More...