वैलेंटाइन डे लव स्टोरी: प्यार सिर्फ मीठी बातों या कैंडल लाइट डिनर तक सीमित नहीं होता। कभी-कभी यह अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में, मॉनिटर की बीप की आवाज के बीच दो जीवनसाथियों के एक-दूसरे के लिए बलिदान में भी झलकता है। पत्नी अपने पति को अपने शरीर का हिस्सा, अपना लिवर गिफ्ट में देकर उसकी जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने से भी नहीं हिचकिचाती। ये कहानी है भरत और सविता की, जिसमें सविता ने अपने पति की जान बचाने के लिए लिवर डोनेट किया। अब दोनों हर साल इस खास दिन को अनोखे तरीके से मनाते हैं, और भरत अपनी पत्नी के इस गिफ्ट को जिंदगी का सबसे अनमोल तोहफा मानते हैं।

गौरतलब है कि, दिल्ली के अशोक विहार निवासी 43 साल के भरत ने बताया कि 2007 में लव मैरिज की थी। दोनों का एक-दूसरे से खास लगाव था। अच्छी खासी जिंदगी चल रही थी, अचानक 2016 में भरत को जॉन्डिस हुआ और धीरे-धीरे उनका लिवर खराब हो गया और ट्रांसप्लांट ही एक मात्र इलाज बचा था। भरत ने कहा कि यह सविता का प्रेम ही है कि उसने मेरी जान बचाने के लिए अपना लिवर मुझे दे दिया, यहां तो लोग एक यूनिट ब्लड डोनेट नहीं करते, इसने अपनी जान की परवाह किए बिना मेरी जान बचाने के लिए लिवर डोनेट कर दिया।

यह गिफ्ट नहीं, बल्कि जीवन है, इसे आप किसी भी गिफ्ट से चुका नहीं सकते। सविता ने कहा कि उन्हें ट्रांसप्लांट और डोनेशन के बारे में ज्यादा पता नहीं था। लेकिन, जब दिन-ब-दिन पति की तबीयत खराब होते हुए देखा तो मैं रह नहीं पाई। मैंने ट्रांसप्लांट को समझा, डोनेशन के बारे में पता लगाया और न तो अपने माता-पिता से बात की और न ही किसी रिश्तेदार से।

सीधा फैसला कर लिया कि भरत की जान बचाने के लिए मैं अपना लिवर डोनेट करूंगी। डॉक्टर से बात की, 13 फरवरी 2016 को गंगाराम अस्पताल में एडमिट हुए। हमने 14 फरवरी वैलंटाइंस डे के दिन 2018 को ट्रांसप्लांट कराया। अब यह दिन हमारे लिए प्रेम का एक ऐसा प्रतीक बन गया है, जिसे हम चाहकर भी भूल नहीं सकते। सविता ने कहा कि हमने इस दिन के लिए बहुत इंतजार किया, लोग वैलंटाइंस डे पर गुलाब गिफ्ट करते हैं, हमने प्यार डोनेट किया है, जिसे महसूस कर हम दोनों खुश रहते हैं।

'प्रेम न उम्र देखती है और न ही कोई बंधन' इस बारे में गंगाराम अस्पताल के लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉक्टर उषास्त धीर ने कहा कि प्रेम करने वाले कपल्स बिना सोचे-समझे एक दूसरे की जान बचाने के लिए तैयार हो जाते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें खुद दर्द क्यों न सहना पड़े। एक अन्य कपल अशोक और सुनीता की कहानी बताते हुए कहा कि प्रेम न उम्र देखती है और न ही कोई बंधन।

शादी के 22 साल बाद जब अशोक का लिवर खराब हुआ तो उनकी पत्नी सुनीता डोनेशन के लिए आगे आईं। पत्नी का ब्लड ग्रुप मैच नहीं कर रहा था। सुनीता ने कहा कि मैं अपने पति को इस हालत में नहीं देख सकती थी, इसलिए ब्लड ग्रुप नहीं मिलने के बाद भी मैंने डॉक्टर से कहा कि मैं लिवर देने को तेयार हूं, तब डॉक्टर ने नए प्रोसीजर और तकनीक के बल पर ट्रांसप्लांट किया , मुझे इतनी खुशी है कि मैं बता नहीं सकती। मेरे लिए तो यही सबसे बड़ा गिफ्ट है कि मेरे पति मेरे साथ हैं।

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