- Post by Admin on Monday, Feb 23, 2026
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रजनी जोशी, राजनांदगांव। बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत के साथ ही विद्यार्थियों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। बच्चों की घबराहट यह संकेत देती है कि परीक्षा का समय केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन की भी परीक्षा बन गया है। ऐसे समय में शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि विद्यार्थी डर नहीं, आत्मविश्वास के साथ परीक्षा कक्ष में प्रवेश करें।
इसी संदर्भ में शिक्षक अंगद सलामे ने विद्यार्थियों को सकारात्मक संदेश देते हुए कहा कि “परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक अवसर है खुद को परखने और निखारने का।” उनका मानना है कि अधिकतर तनाव परिणाम की चिंता से उत्पन्न होता है, जबकि विद्यार्थियों को अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने समझाया कि यदि तैयारी पूरी न भी हो, तो भी घबराने के बजाय शांत मन से जो आता है उसे आत्मविश्वास के साथ लिखना चाहिए। अंगद सलामे ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेने चाहिए, पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और मोबाइल से दूरी बनाकर समय का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों पर अनावश्यक अपेक्षाओं का दबाव न डालें, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित करें। “
जब घर का वातावरण सहयोगी और सकारात्मक होता है, तब बच्चा स्वयं को सुरक्षित और समर्थ महसूस करता है,”। परीक्षा का यह दौर भले ही चुनौतीपूर्ण हो, परंतु यह आत्मविश्वास, अनुशासन और धैर्य सिखाने का अवसर भी है।
जैसा कि शिक्षक अंगद सलामे कहते हैं, “अंक जीवन की सफलता का एक हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन असली जीत वह है जब विद्यार्थी भय पर विजय प्राप्त कर ले।” ऐसे प्रेरक विचारों के साथ विद्यार्थी यदि आगे बढ़ें, तो निश्चित ही सफलता उनके कदम चूमेगी।
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