गोपी: हॉर्न की आवाज, भरी सड़क और ट्रक के केबिन में साजी छोटी-सी रसोई दोस्ती के बीच एक ट्रक ड्राइवर ने ऐसा स्वाद वाला मसाला डाला कि इंटरनेट पर लाखों लोग हो गए। झारखंड के रहने वाले राजेश रवानी आज सोशल मीडिया पर किसी भी सेलिब्रिटी से कम नहीं हैं। रोड किनारे आसान तरीकों से खाना बनाकर उनके वीडियो ने उन्हें 27 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर दिलाए हैं और वे डिजिटल दुनिया में एक अलग पहचान बना चुके हैं। 48 साल के राजेश रवानी ट्रक ड्राइवर हैं, लेकिन दिल से एक जुनूनी रसोइया हैं। वे अपने ट्रक के केबिन को ही मीठी चटनी में बदल देते हैं। पांच बच्चों के गैस स्टोव, कुछ किराने की दुकानें और रास्ते में मिलने वाली ताजी सामग्री के साथ वे मट्टन करी, कलेजी, देसी चिकन और बैलर फिश करी जैसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं।

सीमित स्थान और संरचनात्मक के बावजूद उनके और आरामदायक लोगों को अत्यधिक आकर्षित किया जाता है। डिजिटल यात्रा की शुरुआत 2021 में हुई, जब उनके बड़े बेटे सागर रवानी ने "आर राजेश व्लॉग्स" नाम से यूट्यूब चैनल बनाया। शुरुआत में अप्लाईक पर बच्चों को भेजे जाने वाले रोजमर्रे के वीडियो ही अपलोड किए गए। कुछ ही दिनों में चैनल पर 4,000 सब्सक्राइबर हो गए और कुछ महीनों में यह संख्या लाखों में पहुंच गई।

लोगों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने एक ट्रक ड्राइवर की जिंदगी और संघर्ष को करीब से देखा। की शुरूआत सिर्फ खाना बनाना नहीं, बल्कि हर रेसिपी के साथ यात्रा की कहानी राजेश साझा करना भी है। वे खाना पकाने के समय के रास्ते की झलक, तूफान के आगमन के समय और स्थानीय उपकरणों से प्राप्त सामग्री का भी ज़िक्र करते हैं। उनका मानना ​​है कि सादगी ही सबसे बड़ा स्वाद है।

यही कारण है कि कॉमेडी में रहने वाले युवा और नौकरीपेशा लोग अपनी आसान रेसिपी को लेकर विरोधाभासी लगते हैं। राजेश का जीवन संघर्षों से भी भरा हुआ है। उन्होंने झारखंड के कोयला खदानों के पास एक गैरेज में मैकेनिक के रूप में काम शुरू किया। 1993 में पिता के निधन के बाद परिवार की ज़िम्मेदारी में उनका पुनर्वित्त हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने ट्रक चलाना भी शुरू कर दिया, लेकिन खाना बनाने का शौक कभी खत्म नहीं हुआ। रास्ते में मिलने वाले कलाकारों के साथ मिलकर भोजन बाँटना उनकी पुरानी आदत रही है, जो आज भी कलाकार है।

आज रवानी का ट्रेलर सिर्फ माल नहीं ढोता, बल्कि एक प्रेरक संदेश भी लेकर आया है कि पैशन और साख से काम लेकर किसी भी मंच पर चमकाया जा सकता है। बिना किसी मजबूत तकनीक के, उन्होंने यह साबित कर दिया कि सामान्य उपकरण भी बन सकते हैं, अगर इसमें परिश्रम, स्थिरता और दिल से प्रयास शामिल हो।

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