- Post by Admin on Monday, Feb 16, 2026
- 112 Viewed
![]()
गोपी: हॉर्न की आवाज, भरी सड़क और ट्रक के केबिन में साजी छोटी-सी रसोई दोस्ती के बीच एक ट्रक ड्राइवर ने ऐसा स्वाद वाला मसाला डाला कि इंटरनेट पर लाखों लोग हो गए। झारखंड के रहने वाले राजेश रवानी आज सोशल मीडिया पर किसी भी सेलिब्रिटी से कम नहीं हैं। रोड किनारे आसान तरीकों से खाना बनाकर उनके वीडियो ने उन्हें 27 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर दिलाए हैं और वे डिजिटल दुनिया में एक अलग पहचान बना चुके हैं। 48 साल के राजेश रवानी ट्रक ड्राइवर हैं, लेकिन दिल से एक जुनूनी रसोइया हैं। वे अपने ट्रक के केबिन को ही मीठी चटनी में बदल देते हैं। पांच बच्चों के गैस स्टोव, कुछ किराने की दुकानें और रास्ते में मिलने वाली ताजी सामग्री के साथ वे मट्टन करी, कलेजी, देसी चिकन और बैलर फिश करी जैसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
सीमित स्थान और संरचनात्मक के बावजूद उनके और आरामदायक लोगों को अत्यधिक आकर्षित किया जाता है। डिजिटल यात्रा की शुरुआत 2021 में हुई, जब उनके बड़े बेटे सागर रवानी ने "आर राजेश व्लॉग्स" नाम से यूट्यूब चैनल बनाया। शुरुआत में अप्लाईक पर बच्चों को भेजे जाने वाले रोजमर्रे के वीडियो ही अपलोड किए गए। कुछ ही दिनों में चैनल पर 4,000 सब्सक्राइबर हो गए और कुछ महीनों में यह संख्या लाखों में पहुंच गई।
लोगों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने एक ट्रक ड्राइवर की जिंदगी और संघर्ष को करीब से देखा। की शुरूआत सिर्फ खाना बनाना नहीं, बल्कि हर रेसिपी के साथ यात्रा की कहानी राजेश साझा करना भी है। वे खाना पकाने के समय के रास्ते की झलक, तूफान के आगमन के समय और स्थानीय उपकरणों से प्राप्त सामग्री का भी ज़िक्र करते हैं। उनका मानना है कि सादगी ही सबसे बड़ा स्वाद है।
यही कारण है कि कॉमेडी में रहने वाले युवा और नौकरीपेशा लोग अपनी आसान रेसिपी को लेकर विरोधाभासी लगते हैं। राजेश का जीवन संघर्षों से भी भरा हुआ है। उन्होंने झारखंड के कोयला खदानों के पास एक गैरेज में मैकेनिक के रूप में काम शुरू किया। 1993 में पिता के निधन के बाद परिवार की ज़िम्मेदारी में उनका पुनर्वित्त हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने ट्रक चलाना भी शुरू कर दिया, लेकिन खाना बनाने का शौक कभी खत्म नहीं हुआ। रास्ते में मिलने वाले कलाकारों के साथ मिलकर भोजन बाँटना उनकी पुरानी आदत रही है, जो आज भी कलाकार है।
आज रवानी का ट्रेलर सिर्फ माल नहीं ढोता, बल्कि एक प्रेरक संदेश भी लेकर आया है कि पैशन और साख से काम लेकर किसी भी मंच पर चमकाया जा सकता है। बिना किसी मजबूत तकनीक के, उन्होंने यह साबित कर दिया कि सामान्य उपकरण भी बन सकते हैं, अगर इसमें परिश्रम, स्थिरता और दिल से प्रयास शामिल हो।
अन्य समाचार
जब ‘मैं’ नहीं रहा, सिर्फ ‘हम’ बचा....प्यार सिर्फ मीठी बातों तक सीमित नहीं होता..दो जीवनसाथियों के एक-दूसरे के लिए बलिदान में भी झलकता है
Valentine Day Love Story: सविता और भरत की प्रेम कहानी एक सच्चे बलिदान की कहानी है। भरत का लिवर खराब होने पर सविता ने अपनी जान की परवाह किए बिना उन्हें अपना लिवर डोनेट किया। इस कदम ने उनके वैलंटाइंस डे को हमेशा के लिए खास बना दिया।
Read More...
Vidushi Diksha: 216 घंटे लगातार भरतनाट्यम कर बनाया विश्व रिकॉर्ड
Who Is Vidushi Diksha: भारत के नाम कई उपलब्धियां हैं, उन्हीं में से एक है, भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम का प्रदर्शन सबसे लंबे समय तक करना। कर्नाटक की बेटी विदुषी दीक्षा ने 216 घंटे नृत्य करके ये रिकॉर्ड बनाया है।
Read More...
छोटे गांव बड़े बदलाव...पेड़ लगाकर, सौर ऊर्जा अपनाकर और ग्रामीणों को साथ लेकर,महिला सरपंच ने बदली गांव की तस्वीर
महिलाओं की भागीदारी, सामूहिक निर्णय और पर्यावरण संरक्षण ने इस गांव को नई पहचान दी है। कई विश्वसनीय मंचों ने भी दाव्वा के इस परिवर्तन को देश के सामने रखा है। आज दाव्वा न सिर्फ एक गांव है, बल्कि यह उम्मीद, स्थिरता और जिम्मेदार नेतृत्व की मिसाल बन चुका है।
Read More...
गत्ते के रॉकेट से गामा किरणों तक: दो छात्रों की असाधारण उड़ान
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर निवासी महज 21 वर्षीय स्नेहदीप कुमार और भुवनेश्वर के छात्र मोहित कुमार नायक ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधन भी असीम संभावनाओं में बदल सकते हैं।
Read More...
परिवर्तन के साथ चलना ज़रूरी है, लेकिन अपनी पहचान खोकर नहीं...गहनों में सजी संस्कृति, परंपरा को संवारती शुभा कलाकृति
छत्तीसगढ़ की महिलाएँ मेहनतकश हैं, उनके हाथों में पसीने की चमक है और आभूषणों में आत्मसम्मान की झलक। पारंपरिक गहने केवल सजावट नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीक रहे हैं। मगर यह भी सत्य है कि जिस चीज़ का उपयोग कम होने लगता है, वह धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ती है। आधुनिकता की तेज़ रफ्तार और बदलते फैशन ने इन पारंपरिक गहनों को भी हाशिए पर ला खड़ा किया।
Read More...
15 हजार घोंसलों से लौटी चहचहाहट: सामूहिक प्रयासों ने लौटाई गौरैयों की दुनिया
चेन्नई में एक व्यक्ति की पहल अब शहरी संरक्षण की मिसाल बन चुकी है। महज़ एक साल पहले लगाए गए 15,000 घोंसले के बक्सों के बाद, शहर में गौरैया फिर से दिखाई देने लगी हैं।
Read More...
आत्मनिर्भरता की राह : नाबार्ड के ग्रामीण भारत महोत्सव में रुचि महिला मंडल की सशक्त मौजूदगी
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा आयोजित यह 10 दिवसीय ग्रामीण भारत महोत्सव 19 दिसंबर से 28 दिसंबर 2025 तक गांधी मैदान, पटना में आयोजित किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए स्व-सहायता समूहों, महिला मंडलों और ग्रामीण उद्यमियों ने अपने उत्पादों के माध्यम से ग्रामीण भारत की रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता का सशक्त परिचय दिया।
Read More...
NHAI: एनएच-45 पर भारत की पहली वाइल्डलाइफ-सेफ सड़क, विकास और संरक्षण का नया मॉडल
सड़क विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के मकसद से अपनी तरह की पहली पहल में, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मध्य प्रदेश में नेशनल हाईवे 45 के एक अहम हिस्से पर इनोवेटिव 'टेबल-टॉप रेड रोड मार्किंग' शुरू की है।
Read More...
कर्मयोगी....एयर इंडिया ने 35 हजार फीट की ऊंचाई पर हेलमेट मैन ऑफ़ इंडिया’ को किया सम्मानित
हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार ने, एक सड़क हादसे में अपने खास मित्र को खोने के बाद विक्टिम बनकर विलुप्त रहकर जीना स्वीकार नहीं किया. बल्कि पिछले 12 वर्षों से हर दिन सड़कों पर दुर्घटनाओं के खिलाफ जागरूकता की लड़ाई लड़ रहे हैं.
Read More...
तैराकी की एक असाधारण चुनौती: सीमाओं को तय करने में तत्पर रहने वाली इस दुनिया में, 10 वर्षीय बच्ची ने यह साबित कर दिया कि शरीर की उम्र से कहीं अधिक हृदय की शक्ति मायने रखती है
अपने 10वें जन्मदिन पर, आनवी सुवर्णा ने उत्सव की जगह चुनौती को चुना और भोर में अटल सेतु से गेटवे ऑफ इंडिया तक 17 किलोमीटर तैरकर यह साबित कर दिया कि बहादुरी उम्र की प्रतीक्षा नहीं करती।
Read More...