कमलेश यादव : जब साहित्य अपनी जड़ों से जुड़कर वैश्विक धरातल पर गूंजता है, तब वह केवल शब्दों का संग्रह नहीं रहता, बल्कि संस्कृति और अस्मिता का जीवंत प्रमाण बन जाता है। यही दृश्य देखने को मिला एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव उन्मेष 2025 में, जहाँ छत्तीसगढ़ की धरती से निकली लोकधारा की सशक्त आवाज़ ने सबका मन मोह लिया।

गौरतलब है कि, नई दिल्ली स्थित साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित इस भव्य महोत्सव का आयोजन 25 से 28 सितम्बर तक पटना के रविन्द्र भवन में हुआ। भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय और बिहार सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न इस आयोजन ने साहित्य जगत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। इस अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति माननीय चंद्रपुरम पोन्नूसामी राधाकृष्णन, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, भारत में स्पेन के राजदूत जुआन एंटोनियो, बुलगारिया के राजदूत निकोल यांकोव, और बांग्लादेश के राजदूत एम. रियाज हमीदुल्लाह जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

देश–विदेश से आए कथाकारों, उपन्यासकारों और शोधार्थियों के बीच इस तीन दिवसीय महोत्सव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य मिला भिलाई नगर निवासी वरिष्ठ साहित्यकार और संपादक दीनदयाल साहू को। छत्तीसगढ़ी कहानी वाचन के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया, जहाँ उनके शब्दों ने छत्तीसगढ़ की बोली और लोकजीवन की खुशबू पूरे मंच पर बिखेर दी। उनकी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि क्षेत्रीय भाषाएँ केवल बोली नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और साहित्य की आत्मा हैं।

इस आयोजन में 24 भाषाओं और 70 आदिवासी समुदायों के लेखक शामिल हुए, जिससे यह महोत्सव विविधता और साहित्यिक समृद्धि का अद्भुत संगम बना। कार्यक्रम को सफल बनाने में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक और उपाध्यक्ष-सचिव प्रो. कुमुद शर्मा का विशेष योगदान रहा।

वरिष्ठ दीनदयाल साहू की उपस्थिति ने न केवल छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि स्थानीय से वैश्विक तक साहित्य की यात्रा तभी संभव है जब हम अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करें।

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