कमलेश यादव : कुछ लोग परिस्थितियों के अनुसार अपना रास्ता चुनते हैं, जबकि कुछ लोग परिस्थितियों को ही बदलने का संकल्प लेकर आगे बढ़ते हैं। छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी कहे जाने वाले राजनांदगांव की पूर्व महापौर श्रीमती हेमा देशमुख ऐसी ही प्रेरणादायी शख्सियत हैं, जिन्होंने यह साबित किया कि शिक्षा, दृढ़ इच्छाशक्ति और समाजसेवा का भाव किसी भी महिला को नेतृत्व की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। रास्ते में मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका जीवन आज हजारों महिलाओं के लिए आत्मविश्वास और प्रेरणास्रोत बन चुका है।

श्रीमती हेमा देशमुख का बचपन एक संयुक्त परिवार में बीता। पिता सिंचाई विभाग में एसडीओ थे और घर में शुरू से ही शिक्षा तथा संस्कारों का वातावरण था। मेधावी छात्रा होने के कारण पढ़ाई में विशेष रुचि थी। उन्होंने विधि की पढ़ाई कर अधिवक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई, लेकिन उनके व्यक्तित्व का यह पहलू आज भी बहुत कम लोगों को पता है। छात्र जीवन से ही उनके भीतर कुछ अलग करने और समाज के लिए उपयोगी बनने की इच्छा थी।

विवाह के बाद उनका जीवन एक नए मोड़ पर पहुंचा। पति श्री सुदेश देशमुख का सहयोग और विश्वास उन्हें निरंतर आगे बढ़ाता रहा। समाज और लोगों के बीच काम करते हुए उन्होंने राजनीति को नजदीक से देखा। अक्सर लोग कहते थे कि राजनीति अच्छी नहीं है, लेकिन हेमा देशमुख ने इस सोच को चुनौती देते हुए स्वयं राजनीति में आने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि यदि व्यवस्था में कमियां हैं तो उन्हें दूर करने के लिए शिक्षित और संवेदनशील लोगों को आगे आना चाहिए, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने वार्ड पार्षद के रूप में की। जनसंपर्क, जनसमस्याओं की समझ और लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया। यही विश्वास आगे चलकर उन्हें राजनांदगांव की महापौर की जिम्मेदारी तक ले गया। महापौर रहते हुए उन्होंने शहर के विकास, आधारभूत सुविधाओं और जनहित के अनेक कार्यों के माध्यम से शहर की तस्वीर बदलने का प्रयास किया।

कोरोना काल उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। जब पूरी दुनिया अभूतपूर्व संकट से जूझ रही थी, तब उन्होंने भी अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया। लेकिन इस दौर ने उनके नेतृत्व, धैर्य और सेवा भावना को और अधिक मजबूत बनाया। उन्होंने यह साबित किया कि कठिन समय में घबराने के बजाय साहस और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है।

हेमा देशमुख ने केवल राजनीति तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए भी लगातार कार्य किया। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, निर्णय लेने और समाज में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि जब एक महिला सशक्त होती है तो केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है। यही सोच उनके सामाजिक कार्यों की आधारशिला रही है।

आज लगभग 25 वर्षों से राजनीति में सक्रिय रहते हुए श्रीमती हेमा देशमुख वर्तमान में महिला कांग्रेस छत्तीसगढ़ की प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनकी सफलता के पीछे पति श्री सुदेश देशमुख का निरंतर सहयोग रहा है। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हर चुनौती को अवसर में बदलने का प्रयास किया। श्रीमती हेमा देशमुख का जीवन यह सन्देश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, हौसले मजबूत हों और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी महिला समाज में परिवर्तन की सशक्त वाहक बन सकती है।

Share

अन्य समाचार

img-20260603-wa0015

दूरदर्शन केंद्र में हुए संवाद कार्यक्रम...मुख्यमंत्री ने की ड्रोन दीदी शांति विश्वकर्मा की सराहना

कार्यक्रम में ड्रोन दीदियों की उपलब्धियों ने यह संदेश दिया कि अवसर और संकल्प मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी नवाचार और नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।


Read More...
c4184689-aa86-485c-862a-8c0d5d53e67a

पद्म पुरस्कार की राह पर जनजातीय प्रतिभाएं: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 5 जून तक आमंत्रित किए जा रहे नामांकन

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में जनजातीय समुदाय के उन योग्य और प्रेरणादायक व्यक्तियों की पहचान एवं नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, जो पद्म पुरस्कारों के लिए पात्र हैं।


Read More...
fb-img-1780194015655

विशेष शिक्षा के क्षेत्र में सुनहरा अवसर: समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सी.आर.सी) ठाकुरटोला में प्रवेश प्रारंभ

समेकित क्षेत्रीय केंद्र ठाकुरटोला, राजनांदगांव में पुनर्वास परिषद इंडिया (आर.सी.आई.), नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त दो वर्षीय पूर्णकालिक डिप्लोमा इन एजुकेशन स्पेशल एजुकेशन (आई.डी.डी.) पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम बौद्धिक एवं विकासात्मक विकलांगता के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करता है तथा विद्यार्थियों को व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाता है।


Read More...
img-20260523-wa0025-1

विशेष बच्चों के लिए धमतरी में लगा स्पीच एवं स्पेशल एजुकेशन वर्कशॉप

वर्कशॉप में राजनांदगांव की प्रसिद्ध स्पीच थैरेपी विशेषज्ञ रजनी राठी ने अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कीं। उन्होंने बच्चों की समस्याओं का परीक्षण कर अभिभावकों को आवश्यक परामर्श दिया। साथ ही बच्चों के व्यवहार, भाषा विकास और संचार क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी साझा किए।


Read More...
img-20260511-wa0004

‘प्लास्टिक के जाल’ में कैद होती ग्रामीण संस्कृति, कला ने बयां किया दर्द

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के राजमहल परिसर के सामने जब लोगों की नजर बांस से बनी एक झोपड़ी पर पड़ी, जो काली पन्नियों और प्लास्टिक में जकड़ी हुई थी, तो हर कोई कुछ पल के लिए ठहर गया। यह सिर्फ एक कला प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि ग्रामीण संस्कृति की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद का जीवंत चित्रण था।


Read More...
img-20260508-174235

मदर्स डे विशेष : घर, बच्चे और करियर… ममता और मेहनत की मिसाल रश्मि हरिहारनो का प्रेरक सफर

मदर्स डे के इस विशेष अवसर पर शहर की प्रसिद्ध ब्यूटीशियन रश्मि हरिहारनो की कहानी हर उस महिला को प्रेरणा देती है, जो परिवार और अपने सपनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रश्मि ने यह साबित किया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो एक महिला घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी सफलता की नई ऊँचाइयों को छू सकती है।


Read More...
motion-photo-8960871557772264581

पंचायतनामा : आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ता एक आदर्श गांव

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव ने बीते कुछ वर्षों में एक नई पहचान बनाई है। इस बदलाव के केंद्र में हैं गांव की सरपंच श्रीमती पार्वती मंडावी, जिनकी सोच सिर्फ विकास तक सीमित नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने गांव को सिर्फ सुविधाओं से नहीं, बल्कि अवसरों से जोड़ने का कार्य किया है।


Read More...
img-20260423-wa0000

एकजुट प्रयास, स्वस्थ भविष्य...कुष्ठ मुक्त भारत की ओर कदम

यह कहानी सिर्फ एक सरकारी योजना की नहीं, बल्कि एक बदलाव की शुरुआत है जहां डर की जगह विश्वास ले रहा है, और छुपाने की जगह इलाज सामने आ रहा है। “कुष्ठ मुक्त जिला” अब सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की उम्मीद बन गया है, जो स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जीना चाहता है।


Read More...
1200-675-26510241-thumbnail-16x9-raipur-visakhapatnam-corridor

रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर: बस्तर को मिलेगी ग्लोबल कनेक्टिविटी की रफ्तार

रायपुर विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से गुजर रहा है. जगदलपुर मुख्यालय को इस कॉरिडोर से जोड़ने के लिए ओडिशा के नबरंगपुर का दासपुर इंटरचेंज महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा


Read More...
gujarat-780x405

छत्तीसगढ़ में 2292 सहायक शिक्षक पदों पर भर्ती शुरू, अक्टूबर में परीक्षा संभावित

छत्तीसगढ़ में शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। पहले चरण में सहायक शिक्षक के 2292 पदों पर नियुक्ति की जाएगी।


Read More...