- Post by Admin on Thursday, Mar 12, 2026
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कमलेश यादव: कभी साधारण लगने वाला कपड़ा जब हुनरमंद हाथों से गुजरता है तो वह सिर्फ एक बैग नहीं रहता, बल्कि मेहनत, परंपरा और आत्मनिर्भरता की कहानी बन जाता है। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश कर रही हैं रुचि महिला मंडल समूह की महिलाएं, जिनके द्वारा बनाए गए हैंडलूम कपड़ों के इको-फ्रेंडली बैग आज लोगों के दिल जीत रहे हैं। इन बैगों में सिर्फ उपयोगिता ही नहीं, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति की झलक भी साफ दिखाई देती है।
केंद्र शासन की महत्वाकांक्षी योजना “एक स्टेशन एक उत्पाद” के अंतर्गत राजनांदगांव रेलवे स्टेशन पर स्टॉल में इन बैगों की खास प्रदर्शनी की गई है। यहां से गुजरने वाले यात्री न केवल इन बैगों को देख रहे हैं बल्कि बड़ी संख्या में खरीद भी रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि ये बैग पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बेहद आकर्षक और मजबूत भी हैं।
रुचि महिला मंडल समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए इन बैगों की खासियत यह है कि इनमें 45 से भी अधिक अलग-अलग डिजाइनों के विकल्प उपलब्ध हैं। रंग-बिरंगे पैटर्न, पारंपरिक डिजाइनों और मजबूत कपड़े से बने ये बैग लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। स्टेशन पर आने वाले कई यात्री इन्हें यादगार के रूप में भी खरीद रहे हैं।
समूह की डायरेक्टर रचना शर्मा का कहना है कि इन बैगों के माध्यम से स्थानीय महिलाओं के हुनर को एक नई पहचान मिल रही है। उनका मानना है कि जब महिलाओं को मंच और अवसर मिलता है तो वे अपनी कला से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए बैगों के डिजाइनों में लगातार नवाचार और कलाकारी पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि ये उत्पाद देशभर में अपनी अलग पहचान बना सकें।
दरअसल, कपड़े से बने बैग भारतीय संस्कृति से भी गहराई से जुड़े हुए हैं। सदियों से हमारे देश में कपड़े और हैंडलूम से बने झोले व थैले उपयोग में लाए जाते रहे हैं। यह परंपरा न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और बुनकरों की आजीविका का भी आधार रही है। आज जब प्लास्टिक के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं, तब ऐसे पारंपरिक और पर्यावरण-हितैषी बैगों का महत्व और भी बढ़ गया है।
रुचि महिला मंडल की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। स्टेशन पर इन बैगों की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि अगर स्थानीय हुनर को सही मंच मिले तो वह देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकता है
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