Story of the Day, कमलेश यादव : दिव्यांगता कमजोरी नहीं, बल्कि इंसान के अदम्य साहस और क्षमताओं की पहचान है. चुनौती तब नहीं होती जब शरीर सीमित हो, बल्कि तब होती है जब समाज संकीर्ण दृष्टि से किसी की क्षमता को आंकता है. छत्तीसगढ़ में बंसत साहू, चित्रसेन साहू और होरी लाल यादव जैसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने सोच से ऊपर उठकर अपने हुनर, आत्मविश्वास और लगन से खुद राहें बनायी हैं. तीन दिसंबर यानी आज ‘अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस’ है. आज हम रूबरू होते है तीनो शख्सियत से.....

दिव्यांग बसंत साहू वह नाम है जो हौसले की सबसे ऊँची परिभाषा बनकर उभरा है। 95% शारीरिक अक्षमता के बावजूद उन्होंने जीवन से कभी हार नहीं मानी, बल्कि अपनी कला को अपना संबल बनाया और अपनी अद्भुत पेंटिंग्स से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान बनाई। अपनी परिस्थितियों से लड़ते हुए उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। आज जब राष्ट्रपति द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा रहा है, यह केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, धैर्य, माँ अहिल्या जी की वर्षों की सेवा और समाज को दी गई प्रेरणा का गौरवपूर्ण प्रतीक है। बसन्त साहू की कहानी हर उस व्यक्ति को साहस देती है जो जीवन में टूटने लगता है, कि यदि मन मजबूत हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

दिव्यांग पर्वतारोही चित्रसेन साहू ने जिंदगी की हर चुनौती को हिम्मत की चोटी बनाकर फतह किया है। शारीरिक बाधाओं के बावजूद उन्होंने कई पर्वतों पर विजय प्राप्त की है, और यह उपलब्धि उन्हें असाधारण साहस और जज़्बे का प्रतीक बनाती है। कठिन ट्रैक, ऊँचाई का संघर्ष, मौसम की मार इन सबके सामने भी उनका मनोबल कभी नहीं टूटा। चित्रसेन साबित करते हैं कि अगर इरादा बुलंद हो तो इंसान अपनी सीमाओं से कहीं आगे जाकर ऐसे शिखरों को छू सकता है, जहाँ पहुँचने का सपना भी बहुत लोग नहीं देख पाते। उनका सफर हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में हार मानने की सोच रखता है क्योंकि चित्रसेन साहू का मानना हैं, कि असली ताकत शरीर में नहीं, हौसले में होती है।

रायपुर के Key to Success कोचिंग संस्थान के संचालक दिव्यांग होरी लाल यादव आज संघर्ष, साहस और संकल्प के जीवंत प्रतीक हैं। शारीरिक चुनौती होने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को रुकने नहीं दिया, बल्कि अपनी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। शिक्षा के प्रति गहरी निष्ठा और युवाओं को सही दिशा देने के जुनून ने उन्हें कोचिंग जगत में एक प्रेरणादायक नाम बना दिया है। उनकी संस्था से निकलने वाले कई विद्यार्थी आज सफलता की ऊँचाइयों को छू रहे हैं, जो होरी लाल यादव की लगन, अनुशासन और सकारात्मक सोच का परिणाम है। वे साबित करते हैं कि असली सफलता शरीर से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और निरंतर प्रयासों से मिलती है।

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