सत्यदर्शन लाइव : समाज में कुछ संस्थाएं ऐसी होती हैं जो केवल सेवाएं नहीं देतीं, बल्कि लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आती हैं। दिव्यांगजनों के लिए कार्यरत समग्र क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी), ठाकुरटोला, राजनांदगांव ऐसी ही एक संस्था है, जिसने पिछले 11 वर्षों में हजारों दिव्यांगजनों और उनके परिवारों के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संचार किया है। 25 जून 2026 को अपनी स्थापना के 11 वर्ष पूर्ण करने जा रहा यह केंद्र आज छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजन सशक्तिकरण का एक सशक्त स्तंभ बन चुका है।

गौरतलब है कि, 25 जून 2016 को भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी), सिकंदराबाद के प्रशासनिक नियंत्रण में स्थापित सीआरसी राजनांदगांव का उद्देश्य दिव्यांगजनों को गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराना था। एक छोटे से प्रयास के रूप में शुरू हुई यह संस्था आज राज्यभर में विशेष शिक्षा, चिकित्सकीय परामर्श, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पुनर्वास सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन गई है।

सीआरसी राजनांदगांव की डायरेक्टर स्मिता महोबिया कहती हैं, "पिछले 11 वर्षों की यात्रा केवल उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के विश्वास और संघर्ष की कहानी है। हमारा उद्देश्य प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति को उसकी क्षमताओं के अनुरूप अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है। हम चाहते हैं कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति के सपनों की सीमा न बने। आने वाले वर्षों में भी सीआरसी बेहतर पुनर्वास सेवाओं, आधुनिक तकनीकों और समावेशी दृष्टिकोण के साथ दिव्यांगजनों के जीवन को और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।"

इन 11 वर्षों के दौरान सीआरसी ने उन बच्चों और युवाओं के लिए उम्मीद की नई राह बनाई, जिन्हें समाज अक्सर सीमाओं के नजरिए से देखता था। यहां आने वाले बच्चों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण और थेरेपी के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। कई ऐसे बच्चे, जो कभी सामान्य रूप से संवाद नहीं कर पाते थे, आज आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते हैं। जिन परिवारों के लिए दिव्यांगता एक चुनौती थी, उनके लिए यह केंद्र सहारा और मार्गदर्शक बनकर उभरा है।

संस्था की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुआयामी दृष्टिकोण है। नैदानिक मनोविज्ञान विभाग द्वारा बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक मूल्यांकन किया जाता है, वहीं फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और स्पीच एंड लैंग्वेज विभाग बच्चों के शारीरिक और संप्रेषण कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष शिक्षा विभाग बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत योजनाएं तैयार करता है, जबकि व्यावसायिक प्रशिक्षण विभाग दिव्यांग युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाने का कार्य करता है।

सीआरसी ने केवल उपचार और प्रशिक्षण तक ही अपने कार्यों को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाया है। जागरूकता अभियान, सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम, स्कूल रेडीनेस कार्यशालाएं, अभिभावक प्रशिक्षण, यूडीआईडी, एनएचएफडीसी और निरामया जैसी योजनाओं की जानकारी देकर संस्था ने हजारों परिवारों को सरकारी सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया है।

इसके अलावा जरूरतमंद दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को अधिक सुगम बनाया गया है। इन वर्षों में सीआरसी राजनांदगांव केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और समर्पण का पर्याय बन गया है। यहां कार्यरत विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षकों और कर्मचारियों की टीम ने प्रत्येक दिव्यांगजन को उसकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

यही कारण है कि आज प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग बेहतर पुनर्वास सेवाओं की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं। संस्था ने यह सिद्ध किया है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर दिव्यांगजन भी समाज की मुख्यधारा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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