मानसून से पहले पर्यावरण प्रेमी जितेन्द्र मानसिंग साहू ने मुहिम छेड़ दी है ग्राम चांदो के जंगल में वे कुदाली से जमीन को एक-एक इंच खोदकर आम की गुठलियों को रोप रहे हैं साथ ही गुलेल से व हाथ से गुठलियां फेंक रहे हैं ताकि आने वाले समय में ये गुठलियां वृक्ष बनकर पशु पक्षियों को फल और छाया देंगे।

वे पयार्वरण संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं इस बार उन्होंने चांदो के पहाड़ी जंगल को चुना है झोले में आम की गुठलियां भरकर जंगल में गड्ढा खोदकर उसमें गुठली दबा देते हैं और ऊपर से मिट्टी पत्ते डाल देते हैं। ताकि बारिश शुरू होते ही ये अंकुरित हो जाएंगे और प्राकृतिक तरीके से पेड़ बन जाएंगे। ख़र्च कम फायदा ज्यादा- नर्सरी से पौधे लाने में खर्च और देखरेख ज्यादा होती है।यह तरीका सरल है।

घरों में खाएं जाने वाले आम की गुठली इकट्ठा करो,धूप में सुखाओ और मानसून से पहले जंगल में रोप दो। प्रकृति खुद इसे पेड़ बना देगी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भी आम,जामुन,नीम,महुआ की गुठली जमा कर अभियान से जुड़े। पशु-पक्षियों को मिलेगा भोजन - आम का पेड़ पर्यावरण के साथ वन्यजीवों के लिए भी वरदान है।

गर्मी में हिरण,बंदर, तोता,कोयल जैसे जीव फल खाते है। पेड़ की छाया में वे आराम करते हैं। जंगल में प्राकृतिक फल वाले पेड़ कम होते जा रहे हैं। ऐसे में गुठली रोपण से 5-7 साल में फलदार वृक्षों से भर जाएगा। इससे पशु -पक्षियों को भोजन के लिए गांवों की ओर नहीं भटकना पड़ेगा। एक गुठली एक जीवन का संदेश - इस मुहिम को एक गुठली एक जीवन का नाम दे रहे हैं।

गांव के कुछ स्कूली बच्चें - योशित कुमार,काव्यांश कुमार, मोनिका साहू, वेदिका साहू, लालिमा साहू ने भी साथ जंगल में गुठली रोपना शुरू कर दिया है। जितेन्द्र मानसिंग ने कहां कि आज हम जो गुठली बो रहे हैं,वह कल हमारे बच्चों को फल देंगे। पेड़ लगाना व उसका देख भाल करना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है।

यह कोशिश मानव -वन्य जीव संघर्ष कम करने में भी मददगार साबित होगी। साथ ही मानव जीवन बचाने हेतु 83 बार रक्तदान महादान जीवन दान कर चुके हैं।

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