- Post by Admin on Thursday, May 28, 2026
- 173 Viewed
![]()
कारवी यादव : घर की बालकनी, छत या आंगन में बनाई गई छोटी-सी बागवानी बच्चों के लिए किसी जीवंत पाठशाला से कम नहीं होती। एक मुट्ठी मिट्टी और कुछ बीज बच्चों को सिर्फ पौधे उगाना ही नहीं सिखाते, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य भी समझाते हैं। जब 6 साल का बच्चा अपने हाथों से मिट्टी तैयार करता है और बीज बोता है, तब वह प्रकृति के साथ जुड़ने लगता है। यह अनुभव उसे किताबों से कहीं अधिक गहराई से सीख देता है।
जैविक बागवानी बच्चों को यह समझने का अवसर देती है कि भोजन आखिर उगता कैसे है। मिट्टी में खाद मिलाना, पौधों को पानी देना और धूप की जरूरत को समझना उन्हें प्रकृति के संतुलन से परिचित कराता है।
रसोई से निकलने वाले सब्जियों और फलों के छिलकों को खाद में बदलते देख बच्चे यह सीखते हैं कि प्रकृति में कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता। इससे उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
बच्चों के लिए पुदीना, धनिया, पालक, टमाटर और मिर्च जैसे जल्दी बढ़ने वाले पौधे बेहद रोचक साबित होते हैं। कुछ ही दिनों में अंकुर फूटते देख उनके चेहरे पर खुशी आ जाती है। वे हर दिन पौधों में हो रहे छोटे-छोटे बदलावों को देखकर उत्साहित रहते हैं। यही प्रक्रिया उन्हें धैर्य और नियमित देखभाल का महत्व सिखाती है, क्योंकि पौधे तुरंत नहीं बल्कि समय और निरंतर प्रयास से बढ़ते हैं।
बागवानी बच्चों में अवलोकन क्षमता भी बढ़ाती है। वे समझने लगते हैं कि किस पौधे को कितनी धूप चाहिए और कब मिट्टी को पानी की जरूरत होती है। मिट्टी को हाथ से छूकर उसकी नमी महसूस करना और उसी के अनुसार पानी देना उन्हें संतुलन की सीख देता है। धीरे-धीरे वे यह समझने लगते हैं कि अधिक या कम देखभाल दोनों ही नुकसान पहुंचा सकती हैं।
जैविक बागवानी का सबसे खास पहलू यह है कि इसमें रसायनों के बजाय प्राकृतिक उपायों का उपयोग किया जाता है। नीम आधारित स्प्रे या कुछ पौधों को साथ उगाने जैसी विधियां बच्चों को यह सिखाती हैं कि प्रकृति स्वयं अपने समाधान खोज लेती है। इससे बच्चों के मन में प्रकृति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता विकसित होती है।
जब बच्चे अपने उगाए हुए पुदीने के पत्ते, टमाटर या हरी सब्जियां तोड़ते हैं, तब उन्हें मेहनत का वास्तविक फल महसूस होता है। यह अनुभव उनके भीतर आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है। एक छोटा-सा घरेलू बगीचा बच्चों को जीवन का बड़ा पाठ पढ़ाता है धैर्य, मेहनत, संतुलन और प्रकृति के साथ मिलकर आगे बढ़ने का।
अन्य समाचार
समय बदला, परिस्थितियाँ बदलीं, लेकिन सेवा और समर्पण की भावना आज भी वैसी ही अडिग है...हजारों लोगों को निःशुल्क श्रीमद्भगवत गीता वितरित कर सकारात्मक बदलाव लाने वाले सुमित जी
कहते हैं कि “एक पेन और एक व्यक्ति पूरी दुनिया बदल सकता है”, और यह पंक्ति सुमित गुप्ता पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अब तक वे हजारों लोगों को निःशुल्क श्रीमद्भगवत गीता वितरित कर चुके हैं।
Read More...
सागर शिंदे जैसे अग्निशमनकर्मी हमें याद दिलाते हैं कि असली हीरो फिल्मों में नहीं, बल्कि उन वर्दियों में होते हैं जो हर आपदा में सबसे पहले पहुंचती हैं
घने धुएं और तेज लपटों के बीच अग्निशमन विभाग के स्टेशन अधिकारी सागर शिंदे अपनी टीम के साथ अंदर पहुंचे। हर सेकंड जानलेवा था, फिर भी उनके कदम पीछे नहीं हटे। बाजार के भीतर कपड़ों और सामान का भारी भंडार आग को और भयावह बना रहा था।
Read More...
जब गांव ने बदल दी अपनी तकदीर: महाराष्ट्र का निवाजे बना हरित क्रांति की मिसाल
पिछले एक दशक में लगभग 350 परिवारों वाले इस गांव ने अपनी जीवनशैली बदलकर कार्बन उत्सर्जन को काफी कम कर दिया है। ग्रामीण अब रासायनिक खादों का उपयोग नहीं करते, बल्कि बायोगैस से निकलने वाली स्लरी को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
Read More...
Untold stories of inspirational personalities : नेशनल स्पीच पैथोलॉजिस्ट डे : उन लोगों के नाम जो आवाज़ को पहचान देते हैं
हर वर्ष 18 मई को मनाया जाने वाला नेशनल स्पीच पैथोलॉजिस्ट डे उन विशेषज्ञों को सम्मान देने का अवसर है, जो लोगों की आवाज़, भाषा और आत्मविश्वास को नई पहचान देते हैं।
Read More...
भारत का ‘ट्विन्स विलेज’: एक ऐसा गांव, जहां हर चेहरा किसी दूसरे का प्रतिबिंब लगता है
करीब दो हजार परिवारों वाले इस गांव में सैकड़ों जुड़वां बच्चों के जोड़े मौजूद हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सिलसिला वर्षों से लगातार जारी है। हर साल यहां फिर नए जुड़वां बच्चों का जन्म होता है, मानो इस मिट्टी में कोई अनदेखा रहस्य छिपा हो। वैज्ञानिकों ने पानी, खानपान, पर्यावरण और आनुवंशिक कारणों तक का अध्ययन किया, लेकिन अब तक कोई भी सिद्धांत इस रहस्य का पूरी तरह उत्तर नहीं दे पाया।
Read More...
डफली, जुनून और 500 सीड बॉल…गुलमोहर-अमलतास के बीजों से लिखी जा रही हरियाली की नई कहानी
वीरेंद्र सिंह और उनके साथियों का मानना है कि सिर्फ सरकार के भरोसे पर्यावरण नहीं बचाया जा सकता। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इसी सोच के साथ उन्होंने लोगों से आम खाने के बाद उसके बीजों को फेंकने की बजाय जंगलों या खाली जमीनों में डालने की अपील की
Read More...
कौन हैं IPS बी. सुमति? महिला सुरक्षा का सच जानने के लिए आधी रात को अकेले किया अंडरकवर ऑपरेशन, हर तरफ हो रही चर्चा
Who is IPS B. Sumathi: हैदराबाद की मलकाजगिरी पुलिस कमिश्नर IPS बी. सुमति का अंडरकवर ऑपरेशन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. आधी रात सलवार-सूट पहनकर बस स्टॉप पर पहुंचीं महिला अधिकारी ने महिलाओं की सुरक्षा की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की
Read More...
बेहतर पुलिसिंग का जीवंत उदाहरण: जब एक इशारे ने बचा ली देश की प्रेरणा...सतर्कता से सुरक्षित हुई पद्मश्री फुलबासन बाई यादव
फुलबासन बाई यादव केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत पहचान हैं। अत्यंत साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने हजारों महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वावलंबन की रोशनी जगाई।
Read More...
किसी समस्या को समझने और बदलने की सच्ची इच्छा हो, तो एक साधारण इंसान भी करोड़ों लोगों के जीवन में क्रांति ला सकता है...मासिक धर्म की चुप्पी तोड़ने वाले अरुणाचलम मुरुगनाथम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित
जिस विषय पर समाज खुलकर बात करने से कतराता था, उसी मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर अरुणाचलम मुरुगनाथम ने ऐसा साहसिक कदम उठाया कि आज उनका नाम 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो समाज की चुप्पी को चुनौती देने का साहस रखती है।
Read More...
अगर इरादे मजबूत हों, तो हर अधूरापन भी एक दिन पूरी कहानी बन जाता है...थलापति विजय की कहानी साधारण शुरुआत से असाधारण मुकाम तक
एक और अनछुआ पहलू जो अक्सर चर्चाओं में आता है, वह है विजय का सामाजिक सरोकार। वह कई बार चुपचाप जरूरतमंदों की मदद करते रहे हैं।
Read More...